लखीमपुर खीरी। सरसों तेल के मूल्य में उछाल आने के साथ ही जिले में राइस ब्रान ऑयल की आमद होने लगी है। इसका फायदा उठाने के लिए मुनाफाखोर सक्रिय हो गए हैं। ब्रांडेड कंपनियों ने भी राइस ब्रान मिक्स सरसों तेल बाजार में उतार दिया है। लिहाजा सरसों तेल के रेट पर राइस ब्रान ऑयल भी बिकने लगा। हालांकि कंपनियां ब्लेंडेड (फिल्टर) होने का दावा करती है, लेकिन ब्लेंडेड न होने की दशा में यह तेल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
राइस ब्रान ऑयल का मतलब धान की भूसी से निकाले जाने वाले तेल से है। जिसे औद्योगिक और साबुन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सूत्र बताते हैं कि सरसों तेल में तेजी आने पर व्यापारी राइस ब्रान ऑयल को सरसों तेल की शक्ल देने से नहीं चूकते। कुछ कलर का इस्तेमाल कर राइस ब्रान ऑयल को हूबहू सरसों तेल की तरह बना दिया जाता है। जिसे आम उपभोक्ता आसानी से नहीं पहचान सकता है। क्योंकि सरसों तेल की सेंट का इस्तेमाल कर खुशबू भी पैदा कर दी जाती है। रेट पर गौर करें तो राइस ब्रान आयल 50 से 60 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिकता है। जबकि ब्रांडेड सरसों तेल का रेट 100 से 115 रुपये लीटर तक है। मंगलवार को एक गोदाम पर छापे के दौरान पाया गया कि राइस ब्रान युक्त सरसों तेल के एक लीटर पैक पर 110 रुपये अंकित थे। जबकि इसी रेट पर सरसों तेल भी बिक रहा है। इससे मुनाफाखोर आसानी से उपभोक्ताओं की जेब पर हाथ साफ कर मालामाल हो रहे हैं।
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80 फीसदी तक हो सकता राइस ब्रान ऑयल
नियम-कानून की बात करें तो सरसों तेल में राइस ब्रान आयल की मिलावट के खेल में व्यापारियों को ही फायदा है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसके सिंह के मुताबिक अस्सी फीसदी से ज्यादा राइस ब्रान नहीं मिक्स किया जा सकता है। कम से कम 20 फीसदी सरसों तेल होना चाहिए।
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उपभोक्ता को खुद करना होगा फैसला
सरसों तेल में मिलावट का खेल काफी पुराना है। इस पर रोक के कारगर उपाय शासन भी नहीं खोज सका है। बगैर फिल्टर राइस ब्रान ऑयल के सेवन से किडनी और लीवर की बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा डाइजेशन प्रभावित हो सकता है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसके सिंह ने बताया कि खुले तेल की बिक्री पर पाबंदी है।