भूमि मिलने में नहीं दिख रही कोई बाधा
पलियाकलां। आदिवासी थारू जनजाति के लोगों को अब एलपीजी गैस और पेट्रोल व डीजल के लिए लंबा सफर नहीं तय नहीं करना पड़ेगा। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो यहीं जल्द ही एलपीजी गैस एजेंसी और पेट्रोलपंप की स्थापना हो जाएगी। फिलहाल इसकी स्थापना के लिए प्रशासनिक गतिविधियां तेज हैं।
बता दें कि नेपाल से सटे आदिवासी थारू जनजाति क्षेत्र में वहां के लोगों की दिक्कतों को देखते हुए एक पेट्रोलपंप और एक एलपीजी गैस एजेंसी बनाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया था। इसके लिए जमीन आदि की व्यवस्था में प्रशासन जुटा हुआ है और यहां की आबादी आदि का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है। अभी तक चली प्रक्रिया को देखा जाए जो इन्हें बनने में कोई बाधा नजर नहीं आ रही है। क्षेत्र में जमीन की उपलब्धता है। एकीकृत जनजाति विभाग परियोजना की तमाम जमीन खाली पड़ी हुई है। प्रशासन इसी जमीन पर पेट्रोलपंप और गैस गोदाम निर्माण की संभावनाएं तलाश रहा है। माना जा रहा कि परियोजना इस जमीन को लीज पर दे देगी। जिसके बाद गैस एजेंसी और पेट्रोलपंप के निर्माण का रास्ता तकरीबन साफ हो जाएगा।
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25 जुलाई को आ चुकी है जिले से एक टीम
पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी स्थापना के लिए जमीन आदि औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए जिले से एक टीम भी आ चुकी है। सूत्रों की मानें तो टीम ने एकीकृत परियोजना की इस जमीन को हरी झंडी दे दी है।
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पेट्रोल, डीजल और गैस के लिए आना पड़ता है पलिया
आदिवासी क्षेत्र के लोगों को पेट्रोल और डीजल लेने के लिए करीब 50 किलोमीटर का सफर तय करके पलिया शहर आना पड़ता था या फिर वह मंहगे दामों में वहीं कालाबाजारियों से इसे खरीदते थे। दोनो ही सूरतों में उन्हें इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ती थी, लेकिन अगर पेट्रोलपंप और गैस एजेंसी की स्थापना हो जाती है तो फिर थारू जनजाति को काफी लाभ मिलेगा। उनका समय और अनावश्यक धन दोनो ही बचेंगे।
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गैस एजेंसी से वन पर निर्भरता होगी कम
आदिवासी जनजाति क्षेत्र के लोगों को खाना आदि बनाने के लिए जंगल की लकड़ी पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन गैस एजेंसी खुली तो वनों पर उनकी निर्भरता कम होगी और उन्हें काफी आराम मिल सकेगा। बरसात के दिनों में उन्हें लकड़ी जलाने में पापड़ बेलने पड़ते थे।