फिलहाल विपणन शाखा के क्रय कें द्रों पर लागू होगी व्यवस्था
निर्धारित अभिलेखों के साथ बैंक पासबुक भी ले जानी होगी
लखीमपुर खीरी। गेहूं क्रय केंद्रों पर किसानों का शोषण बंद किए जाने के प्रयास प्रदेश सरकार ने शुरू कर दिए हैं। इसके पहली कड़ में जल्द ही किसानों की बेची फसल का मूल्य आरटीजीएस (रियल टाइम ग्राफ सेटेलमेंट) सिस्टम के माध्यम से उनके खाते में भेजने की तैयारी चल रही रही है। प्रयोग के तौर पर फिलहाल विपणन शाखा के गेहूं क्रय केंद्रों पर इस सिस्टम के माध्यम से किसानों को भुगतान भेजना अनिवार्य कर दिया गया है।
डिप्टी आरएमओ आरबी प्रसाद ने बताया कि अब तक किसानों गेहूं मूल्य का भुगतान चेकों के माध्यम से किए जाने की व्यवस्था थी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में कभी कदार किसानों का शोषण होने की बात सामने आती रही है। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश सरकार का मानना है कि गन्ना मूल्य भुगतान की तरह गेहूं मूल्य का भुगतान भी अगर किसानों के खाते में किया जाने लगे तो किसानों को बिचौलियों के शोषण से एक सीमा तक निजात दिलाया जा सकेगा। प्रयोग के तौर पर प्रदेश सरकार ने फिलहाल विपणन शाखा के गेहूं क्रय केंद्रों पर यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू कर दी है। डिप्टी आरएमओ ने बताया कि इसके लिए किसानों को अन्य अभिलेखों के अलावा बैंक पासबुक की फोटो कापी भी साथ ले जानी होगी। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था जिले में स्थापित विपणन शाखा के लखीमपुर, महेवागंज, भीरा मंडी व गोला मंडी में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। उन्होंने इन क्रय केंद्रों पर जाने वाले किसानों से पासबुक साथ ले जाने को कहा है।