धौरहरा क्षेत्र के हैं पकड़े गए बाल श्रमिक
पकड़े गए नौ बच्चे चाइल्ड लाइन के सुपुर्द
स्कूल जाने की उम्र में परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी
लखीमपुर खीरी। जिले से बाल श्रमिकों को दूसरे राज्यों में भेजने के मामले का भंडाफोड़ हुआ है। समाज सेवी संगठन की सक्रियता से पंजाब जा रहे नौ बच्चों समेत दो ठेकेदारों को पकड़ा गया है। खरीफ सीजन में धान बुवाई के लिए पंजाब में बाल श्रमिकों की काफी मांग रहती है, क्योंकि कम पैसों में इनसे ज्यादा से ज्यादा काम लिया जाता है। वहीं ठेकेदारों को इसके एवज में भारी मुनाफा मिल जाता है। पकड़े गए बच्चों की उम्र आठ से 14 साल तक बताई जा रही है।
रोडवेज बस अड्डे पर एक ठेकेदार के साथ करीब 15-16 बच्चे थे, जो बस के इंतजार में खड़ा था। बताते हैं कि वहां से गुजर रहे समन्वित बाल विकास परियोजना निगरानी समिति के सदस्य विशाल शुक्ला को शक हुआ, तो उन्होंने इसकी जानकारी चेयरमैन विमलेश मिश्रा को दी। इसके बाद समिति के सदस्य डा. आलोक मिश्रा, मयंक व उपेंद्र भी मौके पर पहुंच गए और ठेकेदार समेत चार बच्चों को पकड़ लिया। सभी को कोतवाली लाया गया, जबकि अन्य बच्चे भाग निकले। पूछताछ में ठेकेदार की पहचान शत्रोहन निवासी पांडेपुरवा थाना धौरहरा के तौर पर हुई है। जबकि बच्चों की पहचान कुलदीप पुत्र श्रीकेशन निवासी महादेव, रंजीत पुत्र बल्ली निवासी समदहा, उमेश पुत्र अवधेश निवासी समदहा तथा दिलीप पुत्र शिवबालक निवासी समदहा के रूप में हुई है। ठेकेदार शत्रोहन ने बताया कि बच्चों को लेकर पंजाब के जग्गूपुर जा रहा था, जहां इनसे धान की लइवा लगवाई जानी थी। धान लगवाने के एवज में दो हजार रुपये प्रति एकड़ मजदूरी मिलने की बात ठेकेदार ने बताई है। साथ ही उसने खुलासा किया कि इससे पहले 15 बच्चों की खेप को पंजाब पहुंचा चुका है। बच्चों को चाइल्ड लाइन संस्था के सुपुर्द कर दिया गया है। वहीं ठेकेदार को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
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पकड़े गए बच्चे और ठेकेदार
जीआरपी ने रेलवे स्टेशन से पंजाब ले जाए जा रहे बाल श्रमिक संजय (16) पुत्र शत्रोहन, दामोदर (12) पुत्र जगदीश, हीरालाल (12) पुत्र बदलू, सुनील (11) पुत्र छोटेलाल निवासी पांडेपुरवा और रामटहल (14) पुत्र हरनाम निवासी महादेव को पकड़ा है। इनको लेकर जा रहे ठेकेदार प्यारेलाल निवासी महादेव थाना धौरहरा को पकड़ा गया है।
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बहला फुसला कर बेचने की आशंका
चेयरमैन विमलेश मिश्रा ने बच्चों के बेचे जाने की आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि गांवों से छोटे बच्चों केे अभिभावकों को बहला फुसला कर ठेकेदार दूसरे राज्यों में बच्चों को भेज देते हैं। इन बच्चों से वहां बंधुआ मजदूरी कराई जाती है। अभिभावकों को भी अपने बच्चों के बारे में ठिकाने का पता नहीं होता है। पुलिस-प्रशासन मौन साधे हुए है।