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घास मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन को जुटेंगे विशेषज्ञ

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दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल में हैं 20 फीसदी घास के मैदान

लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में घास के मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन होने जा रहा है। 28 और 29 नवंबर को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से होने वाली कार्यशाला में विशेषज्ञों के साथ दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अलावा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी हिस्सा लेंगे।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि जंगल के 20 प्रतिशत हिस्से में घास के मैदान हैं। यह मैदान दुधवा टाइगर रिजर्व की विशेषता है। यहां दो तरह की घासें हैं। अपलैंड ग्रास और लोलैंड ग्रास। लोलैंड ग्रास को वेटग्रास भी कहते हैं। लोलैंड ग्रास शाकाहारी जीवों विशेषकर हिरन के लिए अधिक उपयोगी होती है। लोलैंड ग्रास की बहुलता के कारण ही दुधवा टाइगर रिजर्व में बारासिंगा हिरनों की अधिक आबादी है। अन्य प्रजातियों की भी संख्या लगातार बढ़ रही है।
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उन्होंने बताया कि घास है, तो बाघ है। इस बात को ध्यान में रखकर घास के मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन का प्रयास किया जा रहा है। ग्रासलैंड के वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर दुधवा नेशनल पार्क के कांफ्रेंस हॉल में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से 28 और 29 नवंबर को कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें विशेषज्ञ के तौर पर नागपुर से डॉ. जीडी मुरातकर, जबलपुर से स्टेट फॉरेस्ट इंस्टीट्यूट मध्यप्रदेश के डॉ. आरके पांडेय, रिटायर्ड आईएफएस डॉ. रजनीकांत मिश्र, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ असम के डॉ. अनुपम शर्मा, डॉ. देवदत्त शामिल होंगे।
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