तहसील क्षेत्र के कुछ गांवों मेें चकबंदी प्रक्रिया में जानबूझकर किसानों के नंबरों में हेराफेरी, फिर संशोधन के नाम पर धन उगाही का खेल चल रहा था। शिकायत पर रेहुआ चौराहा पहुंची एंटी करप्शन टीम ने दस हजार रुपये लेते चकबंदी के राजस्व निरीक्षक को रंगे हाथों दबोच लिया। टीम ने पूछताछ के बाद कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है।
तहसील क्षेत्र के तमनदारपुरवा मजरा बम्हौरी निवासी अजय कुमार वर्मा पुत्र कांशीराम वर्मा ने लखनऊ में एंटी करप्शन ब्यूरो कार्यालय में एक माह पहले शिकायत दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि गांव में चल रही चकबंदी में किसानों के रकबे कम करके उनके खातों में जानबूझ कर हेराफेरी की जा रही है। सही करने के नाम पर किसानों से चकबंदी लेखपाल और राजस्व निरीक्षक अवैध वसूली करते हैं। अजय कुमार वर्मा के मुताबिक उनका खेत 97 एकड़ कम कर दिया गया जिसे पूरा करने के लिए चकबंदी कानूनगो श्रीकांत श्रीवास्तव ने पंद्रह हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
शिकायत पर लखनऊ एंटी करप्शन की 12 सदस्यीय टीम गठित हुई। टीम प्रभारी एसएन सिंह के साथ जटाशंकर सिंह, संजय सिंह, अनुराधा सिंह, जयराम पाल, संतोष द्विवेदी, आशीष तिवारी, धर्मेंद्र यादव, विनोद वर्मा आदि की 12 सदस्यीय टीम दोपहर रेहुआ चौराहा पहुंची। किसान अजय कुमार वर्मा ने वादे के मुताबिक चकबंदी कानूनगो श्रीकांत श्रीवास्तव को ज्यों ही दस हजार रुपये की रिश्वत दी। पीछे से पहुंची टीम ने उसे रिश्वत के रुपयों के साथ दबोच लिया। टीम आरोपी को कोतवाली लेकर आयी जहां उससे पूछताछ के बाद रिपोर्ट दर्ज कराकर जेल भेज दिया गया। कोतवाल सुनील कुमार सिंह ने बताया टीम प्रभारी सुरेश नारायण सिंह की ओर से भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया गया है आरोपी का चालान भेजा जा रहा है।