जंगल किनारे बसे लोगों को मिलेंगे मुफ्त गैस कनेक्शन
वनों पर इंसानी निर्भरता कम करने की कवायद
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। जंगल पर इंसानी निर्भरता कम करने के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन जंगल से सटकर बसे करीब 300 गांवों के लोगों को नि:शुल्क रसोई गैस कनेक्शन देने की योजना बनाई गई है। ग्राम स्वराज योजना के तहत यह गैस कनेक्शन उन परिवारों को दिए जाएंगे जिनके पास पहले से गैस कनेक्शन नहीं हैं। इससे लोगों को ईंधन की लकड़ी के लिए जंगल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और जंगल में घुसपैठ में कमी आएगी।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन जंगल की सीमा से पांच किलोमीटर के अंदर बसे ऐसे तीन सौ गांवों का चयन किया गया है जहां के लोग ईंधन आदि के लिए जंगल पर निर्भर हैं। बफर जोन प्रशासन ने इन तीन सौ गांवों की सूची पेट्रोलियम कंपनियों के नोडल अफसर को उपलब्ध करा दी है। इन गांवों में किन परिवारों के पास रसोई गैस कनेक्शन हैं और किसके पास नहीं है। इसका सर्वे किया जा रहा है। इन चयनित तीन सौ गांवों में मुफ्त कनेक्शन वितरण में किसी जाति, वर्ग या आर्थिक आधार का वर्गीकरण नहीं किया गया है। उन सभी ग्रामीणों को गैस कनेक्शन दिए जाएंगे जिनके पास अब तक रसोई गैस कनेक्शन नहीं हैं। सर्वे का काम पूरा होने के बाद जंगल से सटे गांव के परिवारों को गैस निशुल्क गैस कनेक्शन प्रदान कर दिए जाएंगे।
जंगल पर निर्भरता कम करने के लिए पूर्व में जापान के सहयोग से चलाई गई जायका परियोजना पूरी हो चुकी है। इस परियोजना के तहत जंगल से सटे गांवों के लोगों को स्वयं सहायता समूह और वन समितियां बनाकर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया गया था। देखा यह गया कि अभी तक जंगल के पास रहने वाले लोग ईंधन के लिए जंगलों पर निर्भर हैं। लकड़ी काटने के लिए लोगों के जंगल जाने पर बाघ आदि हिंसक जीवों से उनकी जान का खतरा रहता है।
जंगल से सटे लोगों की ईंधन आदि के लिए जंगल पर निर्भरता कम करने के लिए उन परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन देने की योजना बनाई गई है, जिनके पास पहले से गैस कनेक्शन नहीं है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन जंगल से सटे ऐसे 300 गांव चयनित किए गए हैं जिनकी सूची संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई है। डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन