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सन्नाटे को चीर रही थी
महिलाओं की चीत्कार
तीन मजदूरों की मौत की खबर सुनकर अवाक रह गया गांव
- हल्द्वानी में कंटेनर से दबकर हुई मजदूरों की मौत का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
ईसानगर (लखीमपुर खीरी)।
हल्द्वानी में कंटेनर से दबकर तीन मजदूरों के मरने की खबर जब उनके गांव थाना ईसानगर के गांव वीरसिंहपुर में आई तो गांव के लोग अवाक रह गए। मृतकों के घरों पर मची चीत्कार रात के सन्नाटे को चीरने लगी। लोग मृतकों के घरों की ओर दौड़ पड़े। परिवार के लोग रात में ही शव लेने के लिए हल्द्वानी रवाना हो गए। शव मंगलवार की रात तक गांव पहुंचने की संभावना है।
हफ्तेभर पहले थाना ईसानगर के गांव वीरसिंहपुर निवासी इतवारी का पुत्र 20 वर्षीय सोनू, मुख लाल का पुत्र 25 वर्षीय रामसागर और नकछेद का पुत्र 18 वर्षीय मूलचंद गांव के करीब 14 लोगों के साथ उत्तराखंड के हल्द्वानी काम करने गए थे। हल्द्वानी के आवास विकास कॉलोनी के एक निर्माणाधीन भवन पर मजदूरी करने लगे थे। सोमवार की दोपहर कंटेनर के नीचे बैठकर सोनू, रामसागर और मूलचंद खाना खा रहे थे, कुछ मजदूर कंटेनर से सीमेंट उतार रहे थे। इसी बीच अचानक कंटेनर झुक जाने से तीनों मजदूरों की उसके नीचे दबकर मौत हो गई थी। रात करीब नौ बजे हल्द्वानी पुलिस ने हादसे की सूचना मृतकों के घरों पर दी। इससे घरों में चीख पुकार मच गई। महिलाओं की चीत्कार अंधेरे के सन्नाटे को चीरने लगीं। गांव के ही तीन युवकों की मौत की खबर जब गांव में फैली तो मातमी सन्नाटा पसर गया, जिसने सुना वही मृतकों के घरों की ओर दौड़ पड़ा। चारों तरफ अफरातफरी मची रही। घरवाले शव लेने हल्द्वानी चले गए हैं। मंगलवार को शवों का पोस्टमार्टम हुआ। उम्मीद जताई जा रही है कि शव शाम तक गांव पहुंचेंगे।
किसी का बेटा गया
किसी की उजड़ी मांग
- हादसे से गांव में फैला मातमी सन्नाटा
अमर उजाला ब्यूरो
ईसानगर।
हल्द्वानी में हुए हादसे ने किसी के बेटों को दुनियां से उठा लिया तो किसी की मांग सूनी कर दी।
गांव वीरसिंहपुर में गांव के तीन मजदूरों की मौत से मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। सभी लोग गांव के नौजवान युवकों की मौत से आहत हैं।
हादसे में मारे गए बहेलिया जाति के सोनू, मूलचंद और रामसागर के परिवारों के पास मेहनत-मजदूरी के अलावा रोजी रोटी का कोई दूसरा जरिया नहीं है। गांव के कई परिवारों के चिराग गांव से सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर मजदूरी करके अपने घर परिवार को रुपये भेजा करते थे। सोमवार की रात गांव वालों के लिए काली साबित हुई। साथी गांव के मजदूर सोमवारी ने हादसे की सूचना रात करीब नौ बजे मृतक रामसागर के भाई प्रदीप को दी थी। इसके बाद परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
27 एलकेएच 17
हमेशा के लिए घर का बुझ गया चिराग
हादसे में मारा गया मूलचंद अपने घर का इकतौला बेटा था। उसकी दो बड़ी बहनें हैं, जिनकी शादी पहले हो चुकी है। इकलौते बेटे की मौत की सूचना से उसके मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है। लोग रोते-बिलखते परिवारवालों को दिलासा दिला रहे थे।
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पति की मौत से टूट गया परिवार
हादसे में मारा गया रामसागर काफी मिलनसार था। वह अपने पीछे दो छोटी बेटियों संदीपा, कामिनी और पत्नी को छोड़ गया है। बच्चों को नहीं पता है कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। पत्नी का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
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साल भर ही हुआ उजड़ गई मांग
गांव वीरिसंहपुर निवासी सोनू का पिछले साल ही विवाह हुआ था। उसकी गर्भवती पत्नी सुशीला का रो-रोकर बुरा हाल है। सोनू के कोई बहने नहीं है। बड़ा भाई शंकर गांव में ही मजदूरी करके अपने मां बाप की देखभाल करता है। छोटे भाई की मौत की खबर से वह भी बदहवास है।