लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। ब्लॉक क्षेत्र के पहाड़पुर गांव में गुरुवार दोपहर लगी आग ने 17 परिवारों के सपने जलाकर राख कर दिए। आग इतनी भयानक थी कि किसी को कुछ भी बचाने का मौका नहीं मिला। किसानों के खून पसीने की कमाई धान की फसल घर में कटकर ही आई थी कि आग ने उसे भी खाक कर दिया। दिवाली के ऐन मौके पर लगी आग से लोगों की खुशियां काफूर हो गईं। दिवाली के लिए सजाए घरों पर कालिख पुत गई।
गुरुवार दोपहर गांव के पश्चिम छोर पर ओमप्रकाश के घर पड़े छप्परों में दोपहर में अचानक आग उस समय लगी जब गांव के अधिकांश लोग खेतों में धान काटने और दूसरे कामों में व्यस्त थे। बच्चे स्कूल गए थे। घरों में कुछ महिलाएं ही थीं। अचानक आग लगने से महिलाएं इतनी घबर्राइं कि घरेलू सामान बचाना तो दूर किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई। एक महिला गुड्डी देवी ने हिम्मत जुटाकर कुछ सामान बचा तो जरूर लिया, लेकिन उसके दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए। आग लगने से एक भैंस खूंटे से रस्सी तुड़ाकर खेतों में भागी और गन्ने के खेतों में लगी बाड़ में उलझकर बुरी तरह घायल हो गई, उसे सात टांके लगवाने पड़े।
सूचना पाकर जब तक लोग गांव पहुंचते तब तक उनका सब कुछ जल चुका था। महिलाएं घर के बाहर चीख चिल्ला रही थीं। बच्चे भी स्कूल से लौट आए थे और मां से लिपटकर सूनी आंखों से जले हुए घरों को देख रहे थे। कई किसानों की धान की फसल कट चुकी थी। निकले हुए धान के ढेर घरों में लगे थे, वे सुलग रहे थे देखते ही देखते उनके खून पसीने की कमाई खाक हो चुकी थी।
आग में ग्रामीणों का तिनका-तिनका जोड़कर बनाया गया आशियाना ही नहीं जला उनके सपने भी जल गए। दिवाली की खुशियां जल गईं। घरों में गृहस्थी का सारा सामान, अनाज, बच्चों की किताबें सब कुछ जलकर राख हो गया। त्योहारों के चलते बच्चों के चेहरे पर जो उत्साह झलक रहा था उसकी जगह मायूसी ने ले ली।
आग से सिर का छाया
छिना, रोटी के लाले
अग्नि पीड़ितों इंद्रजीत, गुड्डी देवी, कुलदीप, बबलू, शांती देवी चेतराम आदि ने बताया कि आग लगने से न केवल उनके सिर की छत छिनी है बल्कि परिवार को पालने की समस्या पैदा हो गई है। घर में रखा सारा अनाज जल जाने से दो जून रोटी के भी लाले पड़ गए हैं।