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चीतल के दो शिकारियों को चार साल का कठोर कारावास, एक लाख जुर्माना

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लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उत्तर निघासन रेंज में पिछले साल 15 फरवरी 2018 को चीतल के शिकार के मामले में पकड़े गए दो शिकारियों को सीजेएम कोर्ट ने चार वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। शिकारी के पास से चीतल का सिर बरामद हुआ था।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि वन विभाग की टीम ने 15 फरवरी 2018 को दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उत्तर निघासन रेंज में चीतल के सिर के साथ अजय पाल को पकड़ा था। इसी मामले में दो सितंबर 2018 को दूसरे शिकारी उत्तम को पकड़ा गया। वन विभाग ने 10 सितंबर को कोर्ट में केस दायर किया। एक अक्तूबर को साक्ष्य कराए गए। पांच अक्तूबर को चार्ज फ्रेम किए गए। सात फरवरी को साक्ष्य प्रक्रिया पूरी हुई। 20 फरवरी को बहस पूरी होने के बाद 25 फरवरी को एसीजेएम कोर्ट ने चीतल के शिकार के अपराध के लिए दोषी करार दिया। सजा के विंदु पर सुनवाई के लिए मामले को सीजेएम कोर्ट भेजा गया। सीजेएम कोर्ट ने मंगलवार को दोनों शिकारियों को सजा सुनाई है।
सीजेएम कोर्ट ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9/51(1सी) में चार वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपया जुर्माना, धारा 26 भारतीय वन अधिनियम के अंतर्गत छह माह के कठोर कारावास और एक हजार रुपया जुर्माने की सजा सुनाई है। डीटीआर के एफडी ने बताया कि पूरे केस की विधिक कार्रवाई एक वर्ष के अंदर पूरी करने में विभागीय अधिवक्ता राकेश श्रीवास्तव और संजय राय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
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