सरकारी धान खरीद में सख्त नीतियां मुश्किलों का सबब बनी तो प्रदेश सरकार ने संशोधन करके किसानों को नियमों में ढील देकर राहत दे दी है। इसके बावजूद क्रय केंद्रों पर हालात नहीं बदले और न ही किसानों को इसका लाभ मिलता नजर आ रहा है। ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर क्रय केंद्र सहकारी समितियों की हड़ताल से 18 दिन तक ठप रहे, जिससे करीब 50 क्रय केंद्र प्रभावित हुए तो मंडियों में खुले क्रय केंद्रों पर डेढ़ माह बाद भी व्यवस्थाएं नजर नहीं आ रही हैं। हैंडलिंग ठेकेदार की नियुक्ति एक माह बाद हो पाई, फिर भी मजदूरों की व्यवस्था नहीं है। इससे केंद्र प्रभारी भी किसानों का धान खरीदने में टाल-मटोल करते हैं।
धान खरीद में दलालों और बिचौलियों को दूर रखने के लिए सरकार ने सख्त नीति लागू की थी, जिसमें किसानों के पंजीकरण बाद एसडीएम से सत्यापन कराया गया। इससे हजारों किसानों के गाटा निरस्त हो गए, तो बहुत से किसान जांच की प्रक्रिया से दूर भागने लगे थे। इससे धान खरीद की गति नहीं बढ़ पाई, जिससे समर्थन मूल्य का लाभ किसानों तक पहुंचाना टेढ़ी खीर बन गया था। वहीं सरकार के गोदामों के खाली रह जाने की आशंका बलवती हो गई, जिससे घबराकर सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों को अधिकतम 100 क्विंटल धान बेचने तक एसडीएम से सत्यापन के नियम से छूट प्रदान कर दी है। इससे किसानों के साथ ही केंद्र प्रभारियों को जवाबदेही से राहत मिली है। फिर भी कई केंद्र प्रभारी सीधे किसानों से धान खरीदने में रूचि नहीं ले रहे हैं। राजापुर मंडी स्थित क्रय केंद्रों पर सोमवार को सन्नाटा पसरा रहा। जो किसान धान बेचने के लिए आए, तो उन्हें कुछ क्रय केंद्रों से मजदूर न होने की बात कहकर लौटा दिया गया। तो वहीं कुछ किसान घंटों इंतजार के बाद वापस चले गए। हालांकि केंद्र प्रभारियों ने मजदूर न होने की बात से इंकार किया है, लेकिन मजदूरों की संख्या कम होने की बात स्वीकार की है।
कुत्ता करता मिला रखवाली
राजापुर मंडी स्थित एफसीआई के क्रय केंद्र पर केंद्र प्रभारी और कोई कर्मचारी नहीं मिला, बल्कि वहां पर एक कुत्ता जरूर रखवाली करता मिला। इस दौरान आने वाले किसान भी सूना केंद्र देखकर चले गए। केंद्र प्रभारी पवन कुमार सिंह थोड़ी देर बाद वापस लौटे और उन्होंने बताया कि 160.40 क्विंटल धान की खरीद हुई है। विपणन शाखा के एक क्रय केंद्र पर धान भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी मिली, लेकिन मजदूर न होने से कई घंटों तक तौल न हो सकी।
लाखों खर्च फिर भी काम न आए यंत्र
धान खरीद में तेजी लाने और धान की क्वालिटी बनाने के लिए मंडी परिषद द्वारा अक्तूबर 2018 में आठ डस्टर मशीनों की खरीद की गई है, जिनसे क्रय केंद्रों पर आने वाले धान को साफ किया जाना था। एक डस्टर की कीमत 80 हजार रुपये है, जिस हिसाब से 6.40 लाख रुपये व्यय किए गए। लखीमपुर और गोला की मंडियों में खुले क्रय केंद्रों को डस्टर दिए गए हैं, लेकिन यह निष्प्रोज्य पड़े हैं। कारण है कि इनसे धान की सफाई नहीं हो पा रही है, जिससे मंडी सचिव के प्रयास विफल साबित हुए हैं। इसके अलावा धान की नमी को दूर करने के लिए दो ड्रायर मशीन मंगाई गई है, जिसकी कीमत 10-10 लाख रुपये है। इनकी डिलीवरी अब हुई है, जिसे सोमवार को तैयार किया जा रहा था। सूत्रों की माने तो 10 लाख कीमत वाली यह ड्रायर मशीनें भी निष्प्रोज्य साबित होंगी, क्योंकि अब धान में नमी का स्तर मानक से कम रह गया है।