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पांच दिन की मशक्कत के बाद जंगल में लौटा बाघ

Wed, 31 Oct 2018 06:56 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
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दुधवा टाइगर रिजर्व किशनपुर सेंक्चुरी से सटे चलतुआ गांव में बीते एक सप्ताह से सक्रिय बाघ वन विभाग के पांच दिन की मशक्कत के बाद बड़े जंगल में वापस भेजा जा सका है। जंगल के रास्ते में बाघ के मल और पगचिह्न से इस बात की पुष्टि हुई है। चलतुआ गांव वालों के साथ-साथ दुधवा टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है।
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पिछले सप्ताह शुक्रवार की शाम को चलतुआ गांव से सटे जंगल से निकलकर आबादी के निकट पहुंचे बाघ को देखकर ग्रामीणों में दहशत थी। सूचना मिलने पर वन विभाग ने बाघ की निगरानी शुरू कराई। पहले कर्नाटक के दो मादा हाथी डायना और टेरेसा के जरिए बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए कांबिंग कराई। इसी कांबिंग के दौरान गन्ने खेत में छिपकर बैठे बाघ को टेरेसा ने ढूंढ निकाला। इस दौरान हमलावर हुए बाघ ने मादा हाथी टेरेसा की सूंड़ में पंजा मारकर उसे जख्मी कर दिया। इसके बाद भी बाघ गन्ने खेत में डेरा जमाए रहा। इस पर पार्क प्रशासन ने उसे पकड़ने की योजना बनाई। इसके तहत पिंजरे लगाए गए, जिनमें बकरियां बांधी गईं। आबादी की तरफ खाबड़ भी लगाए गए। ताकि बाघ आबादी की तरफ बढ़ने की कोशिश करे तो पिंजरे या खाबड़ में फांसा जाए, लेकिन बाघ उससे चालाक निकला। वह वन विभाग को लगातार चकमा देकर अपनी जगह बदलता रहा। कांबिग के बढ़ते दबाव के चलते बाघ को मंगलवार की रात जंगल में लौटने के संकेत मिले हैं। डीडी महावीर कौजलगि के मुताबिक बाघ के बड़े जंगल में जाते पगचिह्न और मल मिला है। इससे यह साबित होता है कि बाघ जंगल में वापस लौट गया है।

हाथियों के जरिए बाघ की गतिविधियों पर रखी जा रही नजर
हालांकि चलतुआ गांव के निकट सक्रिय बाघ के जंगल में वापस जाने के संकेत मिले हैं। इसके बावजूद दुधवा के प्रशिक्षित हाथी पवन कली और गजराज के जरिए वन कर्मी बाघ की गतिविधियों पर नजर रखे हैं, ताकि बाघ के गांव की ओर आने से पहले ही उसे खदेड़ा जा सके।
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बाघ के बड़े जंगल में जाने के बावजूद चलतुआ गांव के आसपास वन विभाग की टीमें निगरानी में लगी हुई हैं। बाघ के स्वभाव के मुताबिक उसके फिर वापस आने की संभावना रहती है। इसलिए गांव वालों से भी सतर्क रहने को कहा गया है। महावीर कौजलगि, उप-निदेशक, दुधवा नेशनल पार्क
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