लखीमपुर खीरी। मितौली ब्लॉक की ग्राम पंचायत दतेली कलां में अपात्र को प्रधानमंत्री आवास देने के मामले में सीडीओ की कार्रवाई ने 24 घंटे में ही असर दिखाया है। जांच में दोषी पाए गए आरोपियों ने आननफानन में गबन की गई 1.10 लाख की धनराशि भी बीडीओ मितौली के पास जमा कर दी है। सीडीओ अमित सिंह बंसल ने दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश बीडीओ मितौली को दिए हैं।
दतेलीकलां निवासी प्रभुदयाल (अनुसूचित जाति) ने सीडीओ को दिए शपथ पत्र देकर अनुसूचित जाति के आरक्षित आवास को धोखाधड़ी कर अल्पसंख्यक लाभार्थी के खाते में रकम भेजने का आरोप लगाया था। बुधवार को शिकायत मिलते ही सीडीओ ने स्वयं आनलाइन जांच कर आरोपों को सही पाया था, जिसके बाद उन्होंने बीडीओ मितौली को पूरे मामले की जांच कर 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की थी। बीडीओ ने जांच में पाया कि अनुसूचित जाति के लाभार्थी दुजई पुत्र छेदू की आईडी पर अल्पसंख्यक वर्ग की शहनाज पत्नी ईदी को प्रधानमंत्री आवास की दो किस्तें जारी की गईं, जिसके लिए ग्राम प्रधान जसवीर कौर, तत्कालीन सचिव वीरेंद्र कुमार भट्ट और मौजूदा सचिव मनोज कुमार को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। इससे पहले मितौली ब्लॉक की ग्राम पंचायत चटौरा के मामले में सीडीओ द्वारा की गई कार्रवाई से सबक लेते हुए दोषियों ने 1.10 लाख रुपये जमा कर दिए हैं। फिर भी सीडीओ अमित सिंह बंसल ने दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने के निर्देश बीडीओ मितौली को दिए हैं।
आवासों की रकम हड़पने के पीछे नेटवर्क सक्रिय होने के संकेत
- बैंक में मिलते-जुलते नामों के फर्जी खाते खोले जाने की भी आशंका
लखीमपुर खीरी।
सरकार लाभार्थी को योजना का लाभ सीधे देना चाहती है, लेकिन इसमें भी कुछ लोगों ने सेंधमारी कर दी है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में ऐसे ही कई मामलों का खुलासा हो चुका है, जिसमें बड़े ही शातिर ढंग से लाभार्थी की आईडी पर फर्जी लाभार्थियों के नाम पर रकम निकाल ली गई। वहीं इन सभी घोटालों के पीछे कोई नेटवर्क सक्रिय होने के संकेत मिले हैं।
मितौली ब्लॉक की ग्राम पंचायत चटौरा में सात शौचालयों की रकम इसी तरह निकालकर हड़प ली गई थी, जिसमें दोषी ग्राम प्रधान, सचिव समेत चार लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। इसके बाद मितौली ब्लॉक की ग्राम पंचायत दतेली कलां में एक मामला पकड़े जाने पर विभागीय अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं, क्योंकि सुनियोजित तरीके से आवासों की रकम हड़पने के पीछे पूरा नेटवर्क सक्रिय होने के संकेत मिले हैं।
आशंका है कि आधार कार्ड की अनिवार्यता के चलते लाभार्थी के मिलते-जुलते नाम की फर्जी आईडी बनाकर बैंक में खाता खोलकर इस काम को अंजाम दिया जा रहा है। बैंक अधिकारियों की संलिप्तता के अभी सीधे तौर पर कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन भुगतान बैंक के माध्यम से ही निकाला जा रहा है।
सीडीओ अमित सिंह बंसल ने कहा है कि आवासों के संबंध में मिलने वाली शिकायतों का तुरंत निपटारा कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आवास योजना में गड़बड़ी करने वाले दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।