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लोकतंत्र सेनानियों को मिले स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा

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लखीमपुर खीरी। भारतीय लोकतंत्र रक्षक सेनानी समिति की बैठक में आपातकाल के दौरान मीसा/ डीआईआर के अंतर्गत राजनैतिक बंदी रहे लोगों की समस्याओं पर चर्चा की गई। मांग की गई कि लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के समकक्ष दर्जा प्रदान किया जाए। बैठक की अध्यक्षता संतराम त्रिवेदी ने की।
बैठक में कहा गया कि आपातकाल के समय आजादी की दूसरी लड़ाई लड़ी गई थी, क्योंकि तत्कालीन सरकार ने निजी स्वार्थों के चलते देश के नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया था। लोकतंत्र की हत्या की थी, ऐसे कठिन समय में देश के राष्ट्रवादी संगठनों और उनके कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन सरकार का पूरे देश में विरोध किया, संघर्ष किया, गिरफ्तारी दीं और भीषण यातनाएं सहीं तब जाकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हो सकी।
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लोकतंत्र रक्षक सेनानियों ने मांग की कि लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के समकक्ष दर्जा देकर सभी सुविधाएं प्रदान की जाएं। आपातकाल के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। आपातकाल के समय कर्मठ, संघर्षशील जीवन जीने वाले सभी लोकतंत्र सेनानियों को प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया जाए। लोकतंत्र सेनानियों को नियमित पेंशन भुगतान किया जाए। लोकतंत्र सेनानी के दिवंगत होने के बाद उनके आश्रितों को सभी सुविधाएं प्रदान की जाएं।
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बैठक के बाद लोकतंत्र सेनानियों ने डीएम आकाशदीप को अपनी मांगों का एक ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन देने वाले लोगों में प्रदेश संगठन मंत्री विजय कुमार गुप्ता, कुबेर शंकर शुक्ला, राधेश्याम वैद्य, रामेश्वर दयाल, राम शंकर शुक्ल, बाला प्रसाद, चंद्रनारासन पुरवार, लाल सिंह आदि लोकतंत्र सेनानी शामिल रहे।
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