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7945 व्यापारियों ने शुरू किया जीएसटी से कारोबार

Fri, 14 Jul 2017 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। 
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gst - फोटो : सोशल मीड‌िया
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टर्नओवर कम है, तो भी कराना पड़ेगा जीएसटी में पंजीकरण
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कालाबाजारी पर लगेगा अंकुश, बाजार में आएगी ग्रोथ
नोटबंदी के बाद जीएसटी ने बाजार में बदलाव की लहर पैैदा कर दी है। उपभोक्ताओं में इसका असर जानने के लिए उत्सुकता बनी है। वहीं पंजीकृत व्यापारियों ने भी जीएसटी के मुताबिक धीरे-धीरे कारोबार शुरू कर दिया है। कंप्यूटराइज्ड बिल पर राज्य और केंद्र सरकार को दिए जाने वाले जीएसटी का प्रतिशत अलग-अलग अंकित होने लगा है। 
जिले के कुल पंजीकृत 10025 व्यापारियों में से करीब 8825 व्यापारियों को जीएसटी नंबर आवंटित कर दिया गया है। पंजीकरण के बाद 7945 व्यापारियों ने जीएसटी के डाटा (प्रारूप) पर व्यापार शुरू कर दिया है। जबकि 1200 पंजीकृृत व्यापारियों को जीएसटी नंबर आवंटित किया जाना शेष है। हालांकि कपड़ा (थान एवं साड़ी) व्यापारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जो अभी तक वाणिज्य कर से दूर थे। सरकार ने प्रदेश के अंदर 20 लाख से कम टर्नओवर सालाना होने पर जीएसटी में पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट भले ही दी हैै, लेकिन बैंक के माध्यम से लेनदेन की शर्तें आड़े आएंगी। मसलन 50 हजार या इससे अधिक का माल खरीदने पर डीलर को जीएसटी नंबर देना होगा, क्योंकि यहां पर भी कैश लिमिट तय होना भी इसकी वजह माना जा रहा है। लिहाजा इनकम टैक्स के सवालों से बचने और खुद को सुरक्षित करने के लिए थोक व्यापारी किसी एक व्यापारी को 50 हजार या इससे अधिक माल बेचने पर खुदरा विक्रेता से उसका जीएसटी नंबर मांगेगा। वाणिज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्रर केके वर्मा ने बताया कि जीएसटी में पंजीकरण कराने की प्रक्रिया आसान है, जिसमें व्यापारी को घर बैठे आनलाइन आवेदन जीएसटी की वेबसाइट पर करना होगा। इसके बाद विभाग स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू कर देगा। 
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पहले पांच लाख टर्नओवर तक वैट पर थी छूट
पहले पांच लाख तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को वैट से छूट मिली थी, लेकिन जीएसटी में टर्नओवर लिमिट को बढ़ाकर 20 लाख कर दिया गया है। इसके बावजूद छोटे कारोबारियों को पंजीकरण कराना पड़ सकता है। ऐसा इनकम टैक्स विभाग के नियमों के चलते होगा। पूरे देश में एक बाजार एक दाम की परिकल्पना को साकार करने के मद्देनजर छोटे कारोबारियों को भी जीएसटी का हिस्सा बनना पड़ेगा। हालांकि विभाग ने सितंबर तक व्यापारियों को पूरी तरह तैयारी कर लेने के लिए इस बीच कार्रवाई न करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। लिहाजा वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी बाजार का सर्वे नहीं कर रहे हैं, बल्कि व्यापारियों और वकीलों के साथ मिलकर भ्रम और भ्रांतियों का निदान कराने में व्यस्त हैं। 
 
इनकमटैक्स से बचने के लिए जीएसटी जरूरी
आरबीआई ने दो लाख रुपये कैश लिमिट तय कर रखी है। इसके अलावा थोक विक्रेता भी 50 हजार या इससे अधिक का माल बेचने पर भुगतान चेक या करेंट एकाउंट के माध्यम से लेगा। 10 लाख या इससे अधिक टर्नओवर वाले खुदरा विक्रेताओं को जीएसटी में पंजीकरण कराना पड़ेगा। इससे व्यापारी को भी इनकम टैक्स के सवालों से सुरक्षित करने में मदद मिलेगी। वहीं बाजार में कालाबाजारी पर रोक लगेगी, जिससे बाजार में पारदर्शिता आएगी। 
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गुंजन सिन्हा, कर अधिवक्ता
 
सितंबर तक नए व्यापारियों को जीएसटी का पंजीकरण कराने के लिए छूट दी गई है। इसलिए दुकानों का निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। पहले से पंजीकृत व्यापारियों में ज्यादातर ने जीएसटी नंबर प्राप्त कर लिया है। 50 हजार रुपये से अधिक माल की खरीद करने पर व्यापारी को जीएसटी नंबर थोक विक्रेता को देना होगा। प्रदेश के अंदर ही 20 लाख सालाना टर्नओवर पर छूट है, लेकिन दूसरे प्रदेश से माल खरीदने की दशा में जीएसटी नंबर होना जरूरी है। 
जयशंकर सहाय, आयुक्त, वाणिज्य कर विभाग
 
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