लखीमपुर खीरी। कागजों पर फर्जी प्रसव दिखाकर प्रोत्साहन राशि हड़पने के मामले को सीएचसी अधीक्षक से लेकर सीएमओ तक दबाने में जुटे हैं। सरकारी धनराशि गबन करने के मामले में अफसर कह रहे हैं कि जब रिकवरी करा ली तो कार्रवाई करना उचित नहीं। जबकि सीएचसी के लोगों का कहना है कि पिछले एक साल में हुए प्रसव की अगर जांच हो तो ऐसे दर्जनों मामले सामने आएंगे।
बता दें कि सीएचसी बिजुआ के उपकेंद्र पड़रिया की एएनएम से सांठगांठ कर आशा ने ऐसी महिलाओं का कागजों पर प्रसव दिखा दिया था जिनमें से कुछ जहां कई साल पहले नसबंदी करा चुकी थीं या फिर जिसके बच्चे ही नहीं हैं। मामला खुलने के बाद सीएचसी अधीक्षक सरकारी धनराशि हड़पने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय उसे दबाने में लग गए। हालांकि धनराशि की रिकवरी करा ली गई, लेकिन बड़ा सवाल है कि अफसरों की अनदेखी इस प्रकार के मामलों को और बढ़ावा देगी। सीएचसी के लोगों का कहना है कि ऐसे मामले में कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि सरकारी धनराशि हड़पना गंभीर मामला है। ऐसे में अधीक्षक द्वारा आशा एवं एएनएम को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ देना समझ के परे है।
सरकारी राशि हड़पने का गंभीर है मामला
सीएमओ एवं सीएचसी अधीक्षक भले की प्रोत्साहन राशि हड़पने के मामले को गंभीर न मान रहे हों, लेकिन विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है। ऐसे प्रकरण को गंभीरता से लेकर इसकी विधिवत जांच कराई जानी चाहिए और शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ताकि भविष्य में कोई आशा और एएनएम ऐसा खेल न रच सके।
1. कागजों पर फर्जी प्रसव दिखाकर आशा ने 8100 रुपये हड़प लिए थे, जिसकी जानकारी होने पर उससे रिकवरी करा ली गई है। इसलिए अब किसी प्रकार की कार्रवाई करना नहीं बनता।
डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
2. आशा से पैसा वापस करा लिया गया है। यदि आशा और एएनएम का दोबारा ऐसा कोई प्रकरण मिलता है तो आशा को बाहर का रास्ता दिखाकर एएनएम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
डॉ. अमितेश द्विवेदी, प्रभारी
सीएचसी बिजुआ