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अब बैंक सखी बनकर संभालेंगी बैंकों में कामकाज

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bank - फोटो : स्वावलंबन
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लखीमपुर खीरी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गांवों की महिलाओं में स्वावलंबन (स्वरोजगार) की अलख जगा रहे महिला समूहों (एसएचजी) की कामयाबी में एक और कड़ी जुड़ने वाली है। सरकार ने एसएचजी की सदस्यों को बैंक सखी के तौर पर काम करने के मसौदे (मिशन बैंक सखी पालिसी) को मंजूरी दे दी है, जिसमें संकुल स्तरीय संघ (सीएलएफ) द्वारा बैंक सखी की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए अर्हता मानक निर्धारित किए गए हैं। सबसे पहले निघासन और पलिया ब्लॉक में बैंक सखी की नियुक्ति की जाएगी।
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जिले में पहले निघासन ब्लॉक से शुरुआत होने के बाद से पलिया ब्लॉक में भी काफी एसएचजी ग्रुप बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा अन्य 13 ब्लॉकों में भी एसएचजी ग्रुपों का गठन किया जा रहा है, जिससे बैंक शाखाओं में स्टाफ की कमी के चलते समूहों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समय से बैंकिंग सुविधाएं न मिलने से महिला समूहों का कामकाज प्रभावित हो रहा है।
आंध्र प्रदेश, बिहार, उड़ीसा की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी मिशन बैंक सखी पालिसी लागू करने का निर्णय लिया गया है। यह बैंक सखी समूहों और बैंकों के मध्य सेतु के रूप में कार्य करेंगी। इस कार्य के लिए विभाग द्वारा मानदेय भी दिया जाएगा। इससे पहले एसएचजी की महिला सदस्यों द्वारा इंटरनेट साथी बनकर ग्रामीण महिलाओं को स्मार्टफोन और इंटरनेट के प्रयोग की जानकारी दी जा रही है। हाल में ही इन समूहों को सोलर स्टडी लैंप बनाने की जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है, जिसके लिए आईआईटी मुंबई के विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। अब बैंक सखी बनकर समूह की महिला सदस्य बैंकों में सप्ताह के चार दिन कामकाज संभालती हुईं नजर आएंगी।
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30 समूहों के खाते पर एक
बैंक सखी की तैनाती
बैंकों में सखी की नियुक्ति के लिए हाईस्कूल पास योग्यता निर्धारित की गई है, जिसमें अंकगणित का ज्ञान होना जरूरी है। कम से कम 30 समूहों का बैंक खाता खुला होने पर एक बैंक सखी का चयन किया जाएगा। 80 से 160 समूहों के खाते पर दो बैंक सखी और 160 से अधिक समूहों का बैंक में खाता होने पर अधिकतम तीन बैंक सखी नियुक्त की जा सकेंगी, जो समस्त समूहों को अपनी सेवा उपलब्ध कराएंगी।

बैंक सखी के चयन की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ कर दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। बैंक सखी का कार्यकाल दो साल रहेगा, जिसके बाद उसके कार्यों की समीक्षा और मूल्यांकन करने के पश्चात ही सेवा का समय बढ़ाया जाएगा।
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- रामकृपाल चौधरी, प्रभारी उपायुक्त, स्वत: रोजगार/पीडी
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