लखीमपुर खीरी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर जिले की 70 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। ये महिलाएं सालाना डेढ़ से तीन लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ ही अब ये अन्य महिलाओं को भी जोड़कर उन्हें रोजगार की राह दिखा रही हैं।
पहले ये महिलाएं घर के काम-काज तक सीमित थीं, लेकिन एनआरएलएम से जुड़ने के बाद अपनी अलग पहचान बना रही हैं। जिले में 28 हजार स्वयं सहायता समूह संचालित हैं, जिनसे बड़ी संख्या में महिलाएं जुड़ी हुई हैं। पहले करीब 60 हजार महिलाएं लखपति दीदी बनी थीं, जो अब बढ़कर 70 हजार से अधिक हो गई हैं।
डीसी एनआरएल जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि पहले 1.27 लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य था, जिसे अब बढ़ाकर 2.12 लाख कर दिया गया है। यह लक्ष्य अगले दो वर्षों में पूरा किया जाएगा।
केला उत्पादन के काम से लखपति दीदी बनी हूं, जिससे सालाना करीब दो लाख रुपये की आय होती है। हालांकि इस साल अपेक्षित लाभ नहीं मिला, लेकिन आगे बेहतर उम्मीद है। बाहर के व्यापारी खुद आकर केले की खरीद करते हैं।
-गोदावरी, चंदपुरा
दुग्ध उत्पादन से जुड़कर लखपति दीदी बनने का मौका मिला है। रोजाना करीब पांच क्विंटल दूध एकत्र कर बिक्री करते हैं। एनआरएलएम की मदद से मशीनें मिलीं, जिससे काम आसान हुआ। -अनीता देवी, तेतारपुर
चमड़े का काम पुस्तैनी था, लेकिन विस्तार नहीं हो पा रहा था। एनआरएलएम से जुड़ने के बाद आमदनी बढ़ी और लखपति दीदी बनने का मौका मिला।
-सफीका, बांकेगंज
पहले गृहिणी थी, लेकिन एनआरएलएम से जुड़कर कॉस्मेटिक का कारोबार शुरू किया। इससे आमदनी का नया स्रोत बना और अब अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हूं।
-अनीता देवी, अध्यक्ष, ओम प्रेरणा समूह
गोदावरी
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