लखीमपुर खीरी। जनपद की नौ चीनी मिलों में से पांच चीनी मिलें गोला, पलिया, खंभारखेड़ा, कुंभी और संपूर्णानगर बंद हो चुकी हैं, जबकि चार मिलों अजवापुर, ऐरा, गुलरिया और बेलरायां में पेराई जारी है। किसानों को पैसे की जरूरत है, लेकिन गन्ना मूल्य भुगतान नहीं मिल पा रहा है। पेराई बंद कर चुकी चीनी मिलों के मालिकान मनमानी कर रहे हैं और किसानों को भुगतान के लाले पड़े हैं। मिलों पर 17 अरब 48 करोड़ 19 लाख 23 हजार रुपये गन्ना मूल्य बकाया हो चुका है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों की हालत क्या होगी। हालांकि 14 दिन में भुगतान करने वाली मिलों पर 58.31 करोड़ रुपये ब्याज की देनदारी बन चुकी है।
पेराई सत्र 2018-19 समापन की ओर है। अभी तक नौ मिलों ने 1193.76 लाख क्विंटल गन्ना किसानों से खरीदा है, जिसके एवज में 38 अरब 31 करोड़ 78 लाख 23 हजार रुपये गन्ना मूल्य भुगतान किया जाना है। भुगतान की स्थिति इस वर्ष भी खराब रही। मिल मालिकों ने गन्ना एक्ट के मुताबिक 14 दिन में भुगतान नहीं किया। अभी भी गन्ना एक्ट के मुताबिक 14 दिन पूर्व तक मिलों पर 15 अरब 88 करोड़ 53 लाख 70 हजार रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। सबसे ज्यादा बकाया बजाज ग्रुप की गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिल के साथ ही ऐरा मिल पर है। शासन-प्रशासन के तमाम प्रयास विफल साबित हुए हैं, जिससे किसानों को भुगतान नहीं मिल पा रहा है। बजाज ग्रुप ने पिछले पेराई सत्र का बकाया भुगतान इस वर्ष सत्र चालू होने के बाद किया था, जिससे इस वर्ष भी ऐसी ही आशंका जताई जा रही है।
अभी पिछले वर्ष का भुगतान नहीं किया
14 दिन में भुगतान करना तो दूर गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिल ने दिसंबर 2018 तक का भुगतान नहीं किया है। गोला ने 11 दिसंबर 2018, पलिया ने 12 दिसंबर 2018 और खंभारखेड़ा ने आठ दिसंबर 2018 तक खरीदे गन्ना का भुगतान किया है। इससे स्पष्ट है कि जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल में गन्ना बेचने वाले किसानों को अभी भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
मिल बकाया गन्ना मूल्य (लाख में)
गोला 48632.69
पलिया 37165.64
खंभारखेड़ा 34760.87
ऐरा 28472.17
अजबापुर 7277.09
कुंभी 5300.74
गुलरिया 6119.00
बेलरायां 3417.83
संपूर्णानगर 3673.20
गन्ना मूल्य भुगतान शीघ्र कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। भुगतान में फिसड्डी मिलों को नोटिस के माध्यम से चेतावनी दी गई है। बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज की गणना कराई जा रही है, जिसका भुगतान मिलों को करना होगा।
ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी