वनविभाग ने इस बार दिसंबर माह को बाघ सुरक्षा माह के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। दिसंबर माह बाघ सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील होता है। पिछले कुछ वर्षों में देखने में आया है कि दिसंबर माह में बाघ हमलों की घटनाएं ज्यादा हो रही है। इसके चलते मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। इससे इंसानों के साथ ही बाघों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। इसी के मद्देनजर इस बार वन विभाग प्रदेश स्तर पर बाघ सुरक्षा माह मनाएगा।
बाघ सुरक्षा माह केे तहत दुधवा टाइगर रिजर्व और दक्षिण खीरी वन प्रभाग जंगल से सटे गांवों में विशेष जागरूकता अभियान चलाएगा। ग्रामीणों को वनविभाग बताएगा कि बाघ और दूसरे वन्यजीव किसानों के दुश्मन नही बल्कि मित्र हैं। बाघ और तेंदुओं से किसानों की फसलों की सुरक्षा होती है। जरूरत है वन्यजीवों के साथ सामंजस्य बनाने की। वनविभाग ग्रामीणों को बताएगा कि बाघ और तेंदुए अकारण हमला नहीं करते। जब उन्हें खुद पर खतरा महसूस होता है तभी बाघ और तेंदुए हिंसक होकर हमलावर होते हैं। ऐसी स्थितियों से बचें बाघ, तेंदुआ दिखाई पड़ने पर हांका लगाकर शोरगुल कर उन्हें भगाएं, नजदीक जाने से बचें। जागरूकता ही बचाव है।
बाघ सुरक्षा माह मनाने के लिए जिले के वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जागरूकता अभियान चलाने के लिए रोस्टर तैयार किया जा रहा है। जागरूकता के लिए पोस्टर और पंपलेट आदि छपाए जा रहे हैं। इस दौरान जंगल से सटे गांव के लोगों को बाघों के स्वभाव, प्राकृतिक आवास, भोजन और शिकार करने के ढंग के साथ पगचिह्नों की पहचान की भी भी जानकारी दी जाएगी। ताकि उसके अनुसार लोग सतर्क रह सकें और बाघ, तेंदुओं से खुद का बचाव कर सकें।
डीएफओ साउथ समीर कुमार ने बताया कि दिसंबर माह में जब खेतों में गन्ना तैयार होता है तो बाघ और तेंदुए अक्सर जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में आ जाते हैं। इससे इंसानों के साथ-साथ बाघ और तेंदुओं की सुरक्षा खतरे में पड़ती है। बाघों के लिए दिसंबर माह बेहद संवेदनशील होने के कारण वन विभाग ने दिसंबर माह में पूरे प्रदेश के अंदर बाघ सुरक्षा माह मनाने का निर्णय लिया है। इसमें विशेष जागरूकता अभियान चलेगा।