भारत-नेपाल सीमा पर बह रही मोहाना नदी कौड़ियाला घाट और खैरटिया बांध रोड के निकट कटान करती हुई किसानों की उपजाऊ भूमि और फसलें निगलती जा रही है। इससे किसानों की धड़कनें तेज हो गई हैं। भीषण तबाही के बाद भी सिंचाई विभाग के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
बता दें कि 16 अगस्त को कौड़ियाला घाट पर मोहाना नदी से हो रहे कटान को देखने के लिए सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड शारदानगर के अधिशासी अभियंता डीसी वर्मा टीम के साथ पहुंचे थे। उन्होंने कटान पीड़ितों को कटान रोकने का बंदोबस्त किए जाने का आश्वासन दिया था, लेकिन कौड़ियाला घाट और खैरटिया में कोई भी अधिकारी कटान रोकने का बंदोबस्त करने अभी तक नहीं पहुंचा है।
कौड़ियाला घाट के पास ग्राम बाबापुरवा बरसोला कलां के किसान बृजमोहन मौर्य की दो एकड़, रामकुमार मौर्य की दो एकड़, मंजू मौर्य की एक एकड़, रामविलास की तीन बीघा, हीरालाल की चार बीघा, सावित्री देवी की चार बीघा, रामलखन निषाद की एक एकड़ समेत 50 किसानों की जमीन और गन्ने की फसल नदी में कटकर समा चुकी है। इसी प्रकार ग्राम पंचायत खैरटिया के मजरा गांव अनूपनगर में इंदर सिंह, मुकेश सिंह, चिमन सिंह, सतनाम सिंह, वीर सिंह, बलकार सिंह, संतोष सिंह, गोराया सहित करीब 50 से अधिक किसानों की गन्ने की फसल मोहाना नदी में कटने की कगार पर है।
किसान अपनी पीड़ा किससे कहे कोई सुनने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शुक्रवार को धौरहरा तहसील आगमन पर उम्मीदें जगी थीं शायद उनका आगमन कौड़ियाला घाट पर होगा लेकिन ऐसा न होने से किसानों में मायूसी छा गई है।