किसी भी सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्त होने के बाद कोषागार से पेंशन लेने के लिए अब गवाहों की जरूरत नहीं पड़ेगी। दशकों से चले आ रहे गवाही के नियमों की आड़ में प्रथम पेंशनर को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे अब निजात मिल जाएगी। कई दशक पुरानी इस गवाही व्यवस्था पर खुद कोषागार निदेशालय के अपर निदेशक अजय कुमार मौर्य भी हैरान हैं।
विभागों से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारी को प्रथम पेंशन के लिए कोषाधिकारी के समक्ष आवेदन करना पड़ता है, जहां प्रथम भुगतान के लिए पेंशनर को गवाह लाने की बात कही जाती है। कोषागार की यह व्यवस्था कई दशक पुरानी है, जब लोगों के पास पहचान पत्र जैसे वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि उपलब्ध नहीं थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। बावजूद इसके प्रथम पेंशनर को अपनी पहचान कराने के लिए अब भी दो गवाहों की जरूरत पड़ती थी। बताते हैं कि गवाही के लिए गवाह से लेकर कर्मचारी तक पेंशनर से इस बावत मोटी रकम वसूलते थे। अपर निदेशक अजय कुमार मौर्य ने आदेश जारी कर गवाहों की जरूरत को अब समाप्त कर दिया है। प्रथम पेंशनर को सिर्फ बैंक की मूल पासबुक, आईडी प्रूफ के साथ कोषागार में उपस्थित होना पड़ेगा।
अब पेंशनर को पहचान कराने के लिए गवाहों की जरूरत नहीं है। पेंशन आदेश के साथ बैंक पासबुक और एक आईडी प्रूफ लाना होगा।
- आनंद कुमार, वरिष्ठ कोषाधिकारी