लखीमपुर खीरी। अंतर्राष्ट्रीय कला मंच मुरादाबाद ने अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समारोह एवं शोध गोष्ठी का आयोजन आस्ट्रेलिया के सिडनी में किया। गोष्ठी का विषय था-हिंदी की वैश्विक महत्ता। कार्यक्रम में देश विदेश के शिक्षाविदों, आचार्यों, प्राचार्यों और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया।
गोष्ठी में भगवानदीन आर्य कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय लखीमपुर खीरी की डॉ. बीना रानी गुप्ता ने हिंदी की वैश्विक महत्ता विषय पर अपना सारगर्भित वक्तव्य पेश किया। काव्य गोष्ठी में उनकी कविता मूर्ति विसर्जन और वायुयान के वातायन से सराही गयीं। इस मौके पर प्रकाशित हाइकू कविता संग्रह नेह बहे निर्झर का लोकार्पण डॉ. प्राण जग्गी (अमेरिका), डॉ. सुरेश दिनकर (सिडनी), साहित्यकार डॉ. विद्याबिंदु सिंह, पूर्व कुलपति बिहार डॉ. रविद्र कुमार वर्मा, उज्जैन विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष, प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा, संपादक एवं साहित्यकार डॉ. उषा चौधरी डॉ. जयपाल सिंह, शिक्षाविद, राजनेता, संस्था के संस्थापक और संयोजक डॉ. महेश दिवाकर आदि ने किया। साहित्यिक पत्रिका नवपल्लव के स्त्री विमर्श विशेषांक का भी लोकार्पण हुआ।
हिंदी के संवर्धन और साहित्यिक सृजन के लिए डॉ. बीना रानी गुप्ता को स्व. जगदेव शांत स्मृति हिंदी सेवी सम्मान से अलंकृत करते हुए रुद्राक्ष, स्फटिक की माला, पांच हजार की धनराशि शाल ओढ़ाकर प्रदान की गयी।
डॉ. बीना रानी गुप्ता ने बताया कि इस यात्रा के दौरान आस्ट्रेलिया वासियों से नमस्ते करने पर उसका उत्तर उन्होंने नमस्ते ही दिया। आस्ट्रेलिया के लोग कर्मठ, प्रसन्नचित्त, अनुशासित, खेल प्रेमी, स्वास्थ्य के प्रति सजग और देशप्रेमी होते हैं। वहां ध्वनि, वायु और जल प्रदूषण का तो नामोनिशान ही नही था। उनसे हम भारतवासियों को बहुत कुछ सीखना बाकी है। उन्होंने कहा कि यह साहित्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक यात्रा सदैव याद रहेगी।
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