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जानलेवा बनता जा रहा पीलीभीत बस्ती हाईवे

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लखीमपुर खीरी। पीलीभीत बस्ती नेशनल हाईवे नाम का एनएच-730 है। जिले में बहराइच बार्डर के सिसैया से लेकर शाहजहांपुर बार्डर खुटार के पास तक करीब 120 किलोमीटर की दूरी में गड्ढे ही गड्ढे हैं। आए दिन ये गड्ढे हादसे का कारण बनकर लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। वैसे तो इस मार्ग की मरम्मत का काम दिवाली में ही हो जाना था, लेकिन दो बार टेंडर डालने कोई ठेकेदार आगे नहीं आया, जिससे इसका काम शुरू नहीं हो सका। हालांकि तीसरी पर निविदा आमंत्रित की गई हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो अबकी कई टेंडर बिके हैं। पांच मार्च को टेंडर खोले जाएंगे। उसके बाद इस मार्ग की मरम्मत के कार्य का रास्ता साफ होगा।
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21 फरवरी को शहर से सटे लालपुर बैरियर के पास गड्ढों से बचने के चक्कर में अचानक बाइक रोकने पर ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी थी, जिससे गोला के गांव किशुनवापुर निवासी शुभम वर्मा और करनपुर निबहा निवासी स्वतंत्र मिश्रा की दर्दनाक मौत हो गई थी। सड़क के जानलेवा गड्ढों के कारण इस मार्ग पर अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। हालांकि लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव में इस मार्ग का दस मीटर चौड़ीकरण प्रस्तावित हैं, किंतु सड़क के दोनों ओर पेड़ होने के कारण वन विभाग से एनओसी नहीं मिल पा रही है, जिससे चौड़ीकरण का कार्य अटका है। लोनिवि अधिशासी अभियंता गिरिजेश कुमार ने बरसात के तत्काल बाद इस सड़क का निर्माण कराने के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे, लेकिन कोई भी ठेकेदार ने टेंडर ही नहीं डाला। फिर दिवाली तक सड़क दुरुस्त करने की मंशा से टेंडर आमंत्रित किए गए, लेकिन सिर्फ एक ही निविदा मिली, जिससे मरम्मत कार्य नहीं हो सका। तीसरी बार फिर टेंडर मांगे गए हैं। पांच मार्च को टेंडर खोले जाएंगे। इस बार वर्कआर्डर होने की पूरी उम्मीद है, जिससे सड़क के गड्ढे भरने का रास्ता साफ हो जाएगा। फिलहाल लखीमपुर से गोला तक हाईवे की स्थित खस्ताहाल है। जगह-जगह पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे इस पर सफर करने से हर समय खतरे की संभावना बनी रहती है।

लोगों को हो रही परेशानी, रोडवेज को हो रहा न नुकसान
लखीमपुर खीरी। पीलीभीत से बस्ती तक जाने वाला नेशनल हाईवे लखीमपुर से फरधान तक पूरी तरह से उखड़ गया है। जगह-जगह बड़े बड़े गड्ढे बन चुके हैं। ये जर्जर हाईवे रोडवेज के लिए मुसीबत बन गया है। इस कारण बसों को लखीमपुर से गोला पहुंचने में जहां अधिक समय लग रहा है। तो वहीं डीजल की खपत बढ़ जाने से डिपो की आय भी प्रभावित हो रही है। रोडवेज अधिकारियों को कहना है कि जर्जर हाईवे होने के कारण समय के साथ बसें भी खराब हो रही हैं और प्रति बस डीजल की खपत भी करीब तीन लीटर तक बढ़ गई है।
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35 किलोमीटर की दूरी, डेढ़ घंटे में हो रही तय
लखीमपुर से गोला की दूरी 35 किलोमीटर है, लेकिन रोडवेज बसें ये पूरी करने में डेढ़ घंटे का समय लगाती हैं। बसों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है, लेकिन हाईवे जर्जर होने के कारण बसों को अधिक समय लग रहा है। चालकों का कहना है कि लखीमपुर से फरधान तक हाईवे इतना जर्जर है कि लगता ही नहीं कि बस हाईवे पर चला रहे हैं।

फरधान से लालपुर तक करीब 15 किलोमीटर में हाईवे में गड्ढे ही गड्ढे हैं। जिस कारण लखीमपुर पहुंचने में बसों को जहां अधिक समय लग रहा है। तो वहीं डीजल की खपत भी दो से तीन लीटर बढ़ गई है। बसों को मेंटीनेंस भी बढ़ गया है।
- एके बाजपेई, कारखाना प्रभारी, गोला डिपो

पीलीभीत-बस्ती मार्ग दस मीटर चौड़ी होनी है। धन की भी कमी नहीं है, लेकिन वन विभाग की एनओसी का इंतजार है। वैसे छह मार्च को भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के साथ लखनऊ में बैठक होनी है, जिससे एनओसी का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल मार्च महीने में मरम्मत कार्य शुरू कराने के लिहाज से टेंडर प्रक्रिया की गई है। मंगलवार को वर्कआर्डर हो जाएगा। साथ ही मरम्मत कार्य भी शुरू हो जाएगा।
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- गिरिजेश कुमार, अधिशासी अभियंता, लोनिवि
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