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स्लग-- शारदा नदी में खनन की एक और भयानक तस्वीर
मशीन लगाकर पानी से खींची जा रही बालू
पलियाकलां। शारदा नदी में बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा हैं। इसमें एक मशीन लगाई गई है जिसका पाइप नदी में डालकर पानी से बालू खींची जा रही है साथ ही एक पोलैंड मशीन भी रात दिन बालू निकालने में जुटी है। इस पर खनन अधिकारी बता रहे हैं कि यह ठेका हुआ है लेकिन स्थानीय अधिकारियों को खबर नहीं है कि किसका ठेका हुआ है और कब। यह सवाल पूरे सिस्टम पर उंगली उठा रहा है। फिलहाल जिस तरह से यह मशीन खनन में जुटी है उससे प्रकृति को खतरे की संभावनाएं प्रबल हो गईं हैं।
बताया जा रहा है कि शारदा नदी के बीचो बीच एक मशीन लगी है जिसमें एक लंबा और मोटा पाइप है। यह पाइप नदी में किसी रिफाइनरी की तरह पानी से बालू को खींच रहा है। इसके साथ ही एक पोलैंड मशीन भी है जो लगातार बालू को खींच कर डंप कर रही है। इससे वहां बालू के बड़े बड़े टीले बन गए हैं। लोगों का कहना है कि जिस तरह से यह मशीनें बालू की खुदाई कर रहीं हैं उससे नदी का स्वरूप बिगड़ जाएगा। आने वाले बारिश के दिन खतरनाक साबित हो सकते हैं। रविवार को जब इसकी पड़ताल में खनन अधिकारी सुखविंदर सिंह से फोन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह ठेका हुआ है और सभी को इसकी खबर है। इसकी रजिस्ट्री हुई है। उनके मुताबिक पवनदीप सिंह के नाम अतरिया के गाटा संख्या 504 में यह पट्टा किया गया है जो कि नदी में है। उनके मुताबिक यह करीब 11 हजार घनमीटर का ठेका है और पांच साल के लिए है। जिस तरह से खनन हो रहा है उस तरह से संभावना है लाखों घनमीटर बालू यहां से निकल जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि नया शुरू हुआ यह खनन गंभीर और चिंतनीय है।
अधिकारियों के बोल जुदा
बालू से जुड़े अधिकारी भले ही सबको खबर होने की बात कह रहे हों लेकिन स्थानीय अधिकारियों को इसकी खबर नहीं है। इससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। सीओ पलिया प्रदीप कुमार यादव कहते हैं कि उनको कोई खबर नहीं न ही उनको किसी अधिकारी द्वारा दी गई है। उन्होंने तहसील के अधिकारियों से भी वार्ता की है लेकिन किसी तरह की जानकारी नहीं है। इतना बड़ा ठेका होने की खबर स्थानीय अधिकारियों को न होना बड़ा सवाल है।
बगैर अधिकारियों के कैसे चिह्नित हो गया स्थान
अगर ठेका है तो बिना अधिकारियों की मौजूदगी के खनन का स्थान कैसे चिह्नित हो गया। जिन्होंने भी इतने बड़े पैमाने पर खनन शुरू किया है उनको स्थान किसने चिह्नित कराया, इसका कोई भी पता नहीं है। स्थानीय राजस्व अधिकारियों को इसकी खबर नहीं है कि ठेका कब और किसका हुआ। सवाल है कि खनन करने वाले क्या वास्तविक स्थान पर ही खनन कर रहे हैं।
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इस संबंध में अधिकारियों से वार्ता कर जांच कराई जाएगी। ठेका हुआ है तो सही है या नहीं और सही है तो मानक के तहत कार्य हो रहा है यह नहीं। वह चाहते हैं कि जनता को सस्ती बालू मुहैया हो, जनता की जेब न काटी जाए।
- रोमी साहनी, विधायक