मौसम में बदलाव हो रहा है, ऐसे में बच्चे संक्रामक रोगों की चपेट में आने लगे हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे डायरिया से प्रभावित हो रहे हैं। जिला अस्पताल में डायरिया रोग से पीड़ित भर्ती की संख्या रविवार को छह हो गई, जिनका इलाज चल रहा है।
उल्टी दस्त आने पर ईसानगर निवासी अवध कुमार ने शनिवार को दस माह के पुत्र अजय, रतसिया निवासी चंदन कुमार ने एक वर्षीय पुत्री पूर्णिमा, शहर की कनौजिया कॉलोनी निवासी कृष्ण मुरारी ने दो वर्षीय पुत्री वैष्नवी, रिश्तेदारी में जिले में आए लखनऊ के काकोरी निवासी राहुल ने डेढ़ वर्षीय पुत्र रुद्र को शनिवार को जिला अस्पताल लेकर आए थे, जिनकी हालत गंभीर होने के कारण इन्हें चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर लिया गया। वहीं खीरी के सोंठपुर निवासी जाबिद ने डेढ़ वर्षीय आबिद एवं सुआगाढ़ा निवासी तेजराम ने अपने दो वर्षीय पुत्र शिवा को उल्टी दस्त आने पर रविवार को जिला अस्पताल लेकर आए थे, जिन्हें भर्ती कर लिया गया। चिल्ड्रन वार्ड में डायरिया पीड़ित भर्ती बच्चों की संख्या छह हो गई।
लक्षण
1. बच्चे को एक दिन में तीन या उससे अधिक बार दस्त आना, जिसमें पानी अधिक होना।
2. बच्चा सुस्त हो या फिर उसकी आंखें अंदर की ओर धंसी हुई हों।
3. बच्चे को कुछ भी पीने में असुविधा हो रही हो।
4. पेट की त्वचा पर चुटकी लेने पर त्वचा धीरे धीरे सामान्य अवस्था में आती हो।
डायरिया से जुड़ी भ्रांतियां
1.गांव में माना जाता है कि बच्चे को नजर लग गई है।
2.स्तनपान करने वाली माता द्वारा खान-पान में लापरवाही करना।
3.मां को ठंड लगना, ठंडी एवं खट्टी चीजें खाने या फिर गर्मी से आकर तुरंत बच्चे को स्तनपान कराना
4. बच्चे के दांत आते समय स्वाभाविक रूप से दस्त आना।
डायरिया की वास्तविकता
डायरिया का प्रमुख कारण है कीटाणु और रोगाणु। जब यह कीटाणु या फिर रोगाणु दूषित भोजन, पानी सहित गंदे हाथ एवं अन्य माध्यम से हमारे पेट में पहुंच जाते हैं तो दस्त आना शुरू हो जाते है।
ऐसे करें प्राथमिक उपचार
1. दस्त शुरू होते ही बच्चे को डब्ल्यूएचओ प्रमाणित ओआरएस का घोल एवं जिंक की गोलियां देना शुरू कर दें। यह घोल दस्त के कारण बच्चे में होनी वाली पानी, नमक एवं अन्य पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है।
2. ओआरएस के पैकेट आशा, एएनएम और सरकारी अस्पताल से प्राप्त किए जा सकते हैं।
3. दो से छह माह तक के बच्चों को जिंक की आधी-आधी गोली 10 मिलीग्राम मां के दूध में घोलकर और छह माह से पांच साल तक के बच्चों को जिंक की एक-एक गोली 20 मिलीग्राम की साफ पानी या दूध में घोलकर 14 दिनों तक दें।
मां की जागरूकता से
हो सकता है बचाव
डायरिया बाल मृत्यु का प्रमुख कारण है। मां यदि जागरूक रहे तो बच्चे को इससे बचाया जा सकता है। मां को चाहिए कि वह छह माह तक बच्चे को सिर्फ स्तनपान कराए। इससे अधिक उम्र के बच्चों के खानपान पर और स्वच्छता का ध्यान दे और बच्चे का संपूर्ण टीकाकरण कराए। बच्चे से दूर होने के बाद अच्छी तरह से हाथ धोने के बाद ही गोद लें या फिर खिलाएं-पिलाएं।
बच्चे को यदि उल्टी दस्त शुरू हो जाएं तो बिना लापरवाही करे सरकारी अस्पताल लेकर जाएं। घर में स्वच्छता रखें। बच्चे को अपने आप दस्त बंद होने आदि की दवा न दें। यदि बच्चा स्तनपान कर रहा है तो उसे जारी रखें।
- डॉ. आइबी त्रिपाठी, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, जिला महिला अस्पताल