- चार महीने की खरीद पर पांच दिन पड़े सबसे भारी
- सरकार ने 1,64,240 मीट्रिक टन धान खरीद का दिया था लक्ष्य
खरीफ क्रय वर्ष 2016-17 में मूल्य समर्थन योजना के तहत एक अक्तूबर से शुरू हुई सरकारी धान खरीद 31 जनवरी को बंद कर दी गई है। सरकारी तंत्र की सुस्ती के कारण किसानों को अपनी उपज बिचौलिये के हाथ बेचकर जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा है। डीएम से अनुमति मिलने के बाद करीब एक माह में 53 आढ़तियों 97668.82 मीट्रिक टन धान खरीद डाला, जबकि 97 क्रय केंद्र खोलने वाली नौ सरकारी एजेंसियां महज 31906.60 मीट्रिक टन धान खरीद सकीं। सबसे खास यह है कि आखिरी पांच दिनों में 71450.34 मीट्रिक टन धान खरीद दर्शाई गई है, जिसमें आढ़तियों की 67243.452 मीट्रिक टन धान खरीद शामिल है।
प्रदेश सरकार ने जिले में 1,64,240 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया था। यूपी की सरकारी एजेंसियों खाद्य विभाग, पीसीएफ, एग्रो, एसएफसी, कर्मचारी कल्याण निगम, एनसीसीएफ, कोआपरेटिव यूनियन, नैफेड और केंद्र की एफसीआई ने किसानों का धान खरीदने में रूचि नहीं ली, जिसके बाद सरकार ने आठ दिसंबर को कमीशन एजेंटों (आढ़तियों) को खरीद नीति में शामिल किया। डीएम आकाशदीप ने 53 आढ़तियों को खरीद करने की अनुमति दी, जिसके बाद औपचारिकता पूर्ण करते हुए दिसंबर के आखिरी सप्ताह से आढ़तियों ने धान खरीद शुरू की थी। धान खरीद में एजेंसियों की लापरवाही इस कदर हावी रही कि पीसीएफ ने लक्ष्य 39640 के सापेक्ष 7680 मीट्रिक टन धान खरीदा। इस दौरान पीसीएफ ने तीन माह तक घोषित तौर पर खरीद बंद रखी। एग्रो ने 4500 के सापेक्ष 161 मीट्रिक टन खरीद की। इसी तरह एसएफएसी ने लक्ष्य 12 हजार के सापेक्ष 1918, कर्मचारी कल्याण निगम ने 16 हजार के सापेक्ष 886, एनसीसीएफ ने सात हजार के सापेक्ष 4915, यूपी कोआपरेटिव यूनियन ने 25 हजार के सापेक्ष 132, नैफेड ने 6500 के सापेक्ष शून्य, खाद्य विभाग ने 40 हजार के सापेक्ष 6821 और एफसीआई ने 13600 के सापेक्ष 9390 मीट्रिक टन धान खरीदा है।
कुल लक्ष्य के सापेक्ष 27 जनवरी 2017 तक सभी एजेंसियों और आढ़तियों ने मिलकर 35 फीसदी यानी 58125 मीट्रिक टन धान खरीदा था। इसके बाद पांच दिनों में खरीद का ग्राफ एकाएक बढ़कर 78.89 फीसदी यानी 1,29,575 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। पांच दिनों की खरीद में सबसे बड़ा कमाल आढ़तियों का रहा, जिन्होंने 67243 मीट्रिक टन धान खरीद डाला। जबकि एजेंसियां 4207 मीट्रिक टन में सिमटकर रह गईं।
पिछले वर्ष के प्रदर्शन से भी एजेंसियां पिछड़ी
वर्ष 2015-16 में एजेंसियों और आढ़तियों ने मिलकर लक्ष्य के बैरियर को क्रास करते हुए एक लाख 72 हजार 475 मीट्रिक टन धान खरीदा था। तब सरकारी एजेंसियों ने 48,908 मीट्रिक टन धान खरीदा था, तो आढ़तियों ने एक लाख 23 हजार 567 मीट्रिक टन धान खरीद की थी। इस वर्ष एजेंसियां 31906 मीट्रिक टन तक सिमट गईं।
सरकार ने आढ़तियों को खरीद करने की परमीशन काफी देर से दी, जिससे उम्मीद से कम खरीद हो पाई। खरीद कम होने में नोटबंदी का भी असर रहा है। आढ़तियों ने किसानों से खरीद में पारदर्शिता बरती है।
संजय गुप्ता, अध्यक्ष, राइस मिलर्स एसोसिएशन
लक्ष्य के मुताबिक 78.89 धान खरीद कर ली गई है। कमीशन एजेंटों ने अच्छी खरीद की है। कुल 7541 किसान लाभान्वित हुए हैं, जिनमें अधिकांश को भुगतान कर दिया गया है।
कौशल देव, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी