जनजीवन अस्तव्यस्त, सड़कों पर निकलना हुआ मुश्किल
जिले में भीषण गर्मी का कहर बढ़ता जा रहा है। कड़ी धूप और भीषण गर्मी से जिले का जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त हो गया है। आसमान से आग बरस रही है तो नीचे धरती तप रही है। लगातार बढ़ते तापमान से लोग अकुला उठे हैं। ऐसी गर्मी तो मई जून में पड़ती थी, इस बार अभी से यह हाल है तो मई जून में क्या हाल होगा, यह सोच कर लोग परेशान हैं।
सोमवार को अधिकतम तापमान 42.00 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.00 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। बीती शाम से चल रही पुरवा हवाओं के कारण कुछ राहत जरूर रही लेकिन धूप कड़ी होने से सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया। दोपहर होते-होते सड़कों पर सन्नाटा छा गया। जो लोग घरों से बाहर निकले भी वह धूप से बचाव के पूरे साधन के साथ निकले। गमछा, टोपी, चश्मा और छाते का सहारा लेने के बावजूद लोगों को धूप से राहत नहीं मिल रही है।
भीषण गर्मी में बिजली की बार-बार की आवाजाही ने लोगों की मुसीबतें और ज्यादा बढ़ा दी। दोपहर में कई बार थोड़ी-थोड़ी देर के लिए बिजली गायब रही। इससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। यह कड़ी धूप फील्ड वर्क करने वाले कर्मचारियों के लिए काफी दिक्कत तलब साबित हो रही है। मजदूरों और रिक्शा चालकों को ऐसी कड़ी धूप में काम मिलना और करना दोनों मुश्किल हो रहा है।
बारिश के साथ गिरे ओले, किसानों के माथे पर पड़े बल
गेहूं, मसूर और अरहर की फसल को भारी नुकसान
कड़ी धूप और भीषण गर्मी के बाद सोमवार शाम पलिया, बिजुआ, निघासन आदि जिले के कई इलाकों में बारिश के साथ ओले गिरे। इससे मौसम में तरावट आ गई। बारिश और ओले गिरने से खेतों में खडे़ और खलिहानों में पड़े गेहूं को काफी नुकसान पहुंचा है। मौसम के बदलते तेवर देखकर किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं। किसान अपनी फसल को जल्दी से जल्दी ठिकाने लगाने की चिंता में हैं।
पलियाकलां। क्षेत्र में भीषण गर्मी के बाद अचानक मौसम ने करवट बदली। जिसके बाद हुई बारिश तथा ओले गिरने से जहां मौसम में नमी आई है वहीं फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। बारिश व ओलावृष्टि ने एक बार फिर से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें डाल दी हैं।
क्षेत्र में शाम को अचानक मौसम ने करवट बदली। इसके बाद तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। ओले गिरने के कारण तमाम फसलों को नुकसान पहुंचा है। जिसमें मसूर, आम के साथ ही गेहूं की फसल लगभग चौपट मानी जा रही है। इसके साथ ही अपनी पूरी तैयारी पर अरहर की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है। जिससे किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें आ गई हैं। एक तरफ जहां गन्ना फसल का भुगतान नहीं मिल पा रहा है वहीं दूसरी तरफ बारिश और ओलावृष्टि से किसान चिंतित हो गए हैं।
मझगईं। इलाके में भी बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई जो मौसम को खुशगवार कर गई तो वहीं किसानों की फसलों को नुकसान भी पहुंचा गई। बिजुआ और निघासन में बारिश से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।