पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश से नदियां उफनाने लगी हैं। दो दिन पहले बनबसा डैम से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से तराई के जिलों में शारदा नदी का जलस्तर और बढ़ गया है। फूलबेहड़ में बंधे के अंदर बसे इलाके पानी से घिर गए हैं। नरहर, मैनहा और कुचिलहा गांव टापू नजर आ रहे हैं। खेतों में खड़ी गन्ने की फसल जलमग्न हो गई है।
गांवों में बाढ़ का पानी आ जाने से ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में बाढ़ जैसे हालात हैं।
गुरुवार को सदर तहसील के कानूनगो अंकित अवस्थी ने मौका मुआयना कर रिपोर्ट अधिकारियों को दी। हालांकि प्रशासन हालात सामान्य होने की बात कह रहा है। नायब तहसीलदार डॉ. लालकृष्ण ने बताया कि बनबसा से छोड़ा गया कुछ पानी निचले गांवों में घुसा है। हालात सामान्य है। राजस्व कर्मी निगरानी कर रहे हैं।
प्रभावित गांवों के बच्चे नही जा पा रहे स्कूल
फूलबेहड़ में बंधे के पेट में बसे सैकड़ों गांव कई दशक से शारदा नदी की बाढ़ से प्रभावित होते रहे हैं। इस बार भी ग्रामीणों को बाढ़, कटान का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के कई स्कूल भी बाढ़ की चपेट में है। इससे सैकड़ों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गांव के गांव बाढ़ से घिरे होने से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। गुरुवार को जंगल नं. 10 के करीब पांच छात्र चार किलोमीटर की दूरी तय कर गूम गांव स्थित स्कूल में पढ़ने पहुंचे। खास यह कि दोपहर बाद एकाएक नदी ने फिर उफान ले लिया। देखते ही देखते बनबसा बैराज से छोड़े गए अतिरिक्त पानी ने फूलबेहड़ के सैकड़ों गांवों को टापू बना दिया। इससे गांव में स्थित सरकारी स्कूलों में पढ़ाई फिर ठप हो गई।
इन गांवों के स्कूल बाढ़ से घिरे
फूलबेहड़ में बंधे के अंदर बसे खगईपुरवा, बेचनपुरवा, मंगलीपुरवा, घोसियाना, खाम्भी, झखरा, खमरिया, गूम, इच्छारामपुरवा, बेड़हासुतिया, बसहाभूड़, लेंगड़ीपुर, जंगल नं. 10 और 11 समेत करीब डेढ़ दर्जन सरकारी स्कूल बाढ़ से प्रभावित हैं।