फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऐतिहासिक मेला चैती

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो-01 एलकेएच 201 और 206
विज्ञापन


लीड
फ्लैग..
छोटी काशी का ऐतिहासिक चैती मेला
मेन...
मानव को मिला भगवान
से, वरदान है बेटी....
- स्थानीय कवियों ने बिखेरे काव्य की विधाओं के रंग
अमर उजाला ब्यूरो
गोला गोकर्णनाथ।
छोटी काशी में ऐतिहासिक मेला चैती के सांस्कृतिक मंच पर स्थानीय कवियों ने विभिन्न विधाओं के रंग बिखेरकर श्रोताओं को देर रात तक काव्यरस में भिगोए रखा।
सांस्कृतिक मंच पर प्रधानाचार्य मोहन कुमार तायल की अध्यक्षता, संतकुमार बाजपेयी संत के संयोजन में हुए स्थानीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व प्रवक्ता प्रेमचंद वर्मा, पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल, ईओ आरआर अंबेश ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप जलाकर किया। वाणी वंदना के बाद बेनीराम श्रीवास्तव अंजान ने कहा कि-
करे जो हिंद से नफरत तराने पाक के गाए।
कसम खाकर के कहता हूं, मुसलमां हो नहीं सकता।।
मधुकर शैदाई ने गजल पढ़ी-
वादा कभी जबान से झूठा नहीं किया, हमने कभी जमीर का सौदा नहीं किया।।
संतकुमार बाजपेयी संत ने कुछ यूं कहा-
बइसाख मां तरुआ चटका तबहुं ने चेतेउ,
भादौ मइहां कुआं खुदायउ वा रे दद्दू।
नंदीलाल निराश ने हास्य रस बिखेरा-
पैसा फूलि दुगना होइगा, रुपइयक भाव अधन्ना होइगा।।
बालकृष्ण मिश्र ने अपने काव्यपाठ से चैती मेला का दर्शन कराया-
लिहे जाउ लरिका सग मां सइंया हमार, यूं देखइया है चैती मेला लरिका तुमार।
श्याममोहन मिश्र ने हनुमान जी का चित्रण किया-
राम राम राम राम नित्य जपै राम राम, ऐसे रामदूत को नमामि बार बार है। बेदिल भारती ने गजल सुनाई-
हुक्मरानों का फैसला क्या है, इनके जह्नों को ये हुआ क्या है?
डॉ. वीरेशचंद्र बाजपेयी ने बेटी पर सुनाया-
घरों मान और सम्मान का अभियान है बेटी, ये मानव को मिला भगवान से वरदान है बेटी।
आलोक तिवारी ने दर्शकों में ओज भरा-
बड़ा हुआ जब पढ़ लिखकर, सेना में भर्ती होनी थी।
सरहद पर अरमान यही, तस्वीर लहू से धोनी थी।।
सुधीर अवस्थी ने गीत सुनाया-
तन की निष्ठाओं में हमने डाल दिए पतवार,
प्रीत तो हो गई अब व्यापार।
संचालन करते हुए डॉ. वेदप्रकाश अग्निहोत्री ने कहा-
कहीं जब स्वार्थ की खातिर अस्मिता हो गई बेची,
गला जब न्याय का घुटता तो कविता बोल उठती है।
द्वारिका प्रसाद रस्तोगी ने हास्य रस से दर्शकों को खूब हंसाया-
बदन उघारि घूमने का हो विचार यदि,
कभी किसी बाबा के समीप नहीं जाइए।
मनोज शुक्ल मनुज ने सुनाया-
वक्त के शैतान हरबर हो गए, खौफ खाने जैसे मंजर हो गए।
फावड़े, हसिए, हथौडे, टूटकर, भूख से तड़पे तो खंजर हो गए।।
रिंकी राठौर ने कहा-
तेरी नजरों ने किया, मुझपे सनम ऐसा असर,
न ही दुनियां का पता, और न ही अपनी खबर।
इसके साथ ही मुनेंद्र प्रताप सिंह, रामजी गुप्त, मुरलीधर त्रिपाठी अंजान, रामकुमार गुप्ता, आसिफ खान, आशू तिवारी, कृष्णदत्त शुक्ल, रामस्वरूप सिंह, श्रीपाल वर्मा, सतीशचंद्र मिश्र, कनक तिवारी, शशिकांत मिश्र, श्रीकृष्ण मिश्र, गेंदनलाल कनौजिया, रमेश पांडे शिखर, विनय प्रकाश शुक्ल, बृजेश तिवारी बृजेश, अवधेश पांडे हंस, मिथलेश शुक्ल विदेह, पवन कुमार मिश्र, राजीव प्रकाश शर्मा चिंतक आदि ने काव्यपाठ किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इनकी रही मौजूदगी
इस मौके पर मेला प्रभारी यदुवीर सिंह, नगर पालिका परिषद के सदस्य नानकचंद वर्मा, रामकृष्ण शुक्ला, आशीष अवस्थी, वीरेंद्र कुमार, जमाल अहमद राईन, आनंद सोनी, गुड़िया, हषर्ऱ् अवस्थी, अचल अवस्थी आदि मौजूद रहे।
चैैती मेला में आज
छोटी काशी के ऐतिहासिक मेला चैती के सांस्कृतिक मंच पर स्कूल के बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम आठ बजे से।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें