21 एलकेएच 11, 12
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पुल बनाने को रोका था प्रवाह,
फिर पत्थर हटाना ही भूल गए
नेशनल हाईवे 24 पर पुल बनाने के दौरान ठेकेदार ने गोमती नदी में डलवाए थे पत्थर
- नदी के एक ओर का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण परेशान
- बहाव रुकने से नदी बनी तालाब, जमी काई और सिल्ट
अमर उजाला ब्यूरो
हैरमखेड़ा (लखीमपुर खीरी)।
चपरतला गांव में नेशनल हाईवे 24 पर फोरलेन सड़क के लिए गोमती नदी पर पुल बनाया गया है, जिसके निर्माण के दौरान ठेकेदार ने गोमती नदी में बड़े-बड़े पत्थर डालकर धारा को रोक दिया था। अब पुल बनकर तैयार हो चुका है, बावजूद इसके ठेकेदार ने गोमती की धारा का प्रवाह शुरू नहीं किया है, जिसके चलते नदी ने एक ओर तालाब का रूप ले लिया है। धारा रुकने के कारण जल क्षेत्र में काई और सिल्ट जम गई है। वहीं लखनऊ की ओर गोमती का बहाव भी महीनों से बंद चल रहा है।
जनपद के नेशनल हाईवे 24 पर चपरतला के पास गोमती नदी की धारा रोके जाने से लखनऊ की ओर बहाव थम सा गया है। पुल का निर्माण एरा कंट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर अरुण चौधरी की निगरानी में कराया गया है। पुल निर्माण के दौरान डाले गए बड़े-बड़े पत्थरों और सिल्ट की वजह से एक हिस्से में पानी ठहर जाने से गोमती नदी में कचरा जमा हो गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर ठेकेदार ने नदी में पड़े पत्थर नहीं हटाए गए तो कहीं नदी अपनी धारा ही न बदल ले।
ग्रामीणों की ऐसे बढ़ीं मुश्किलें
गोमती की जलधारा रोके जाने से अलियापुर, अब्बासपुर, महुआढाव आदि गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी आ रही है। क्योंकि नदी के दूसरी ओर स्थित मकसूदपुर गांव में बाजार लगती है, जहां इन गांवों के लोग खरीददारी करने जाते हैं। इसके अलावा नकटी प्रकाशनगर गांव में प्राचीन मंदिर देगेगेश्वर नाथ पर मेला चल रहा है। अत्यधिक जलभराव के कारण लोगों की जानमाल का खतरा बना हुआ है।
मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जाएगी और संबंधित कंपनी के खिलाफ नोटिस देकर जवाब तलब कर गोमती की जलधारा का बहाव सुगम कराया जाएगा।
- रामप्रकाश, एसडीएम, मितौली
अभी दूसरी साइड पर काम चल रहा है। जल्द ही जेसीबी भेजकर नदी की धारा रोकने वाले पत्थरों का हटवा दिया जाएगा।
- अरुण चौधरी, प्रोजेक्ट मैनेजर, एरा कंट्रक्शन कंपनी
धार्मिक महत्व रखती है गोमती नदी
पीलीभीत जिले के माधौटांडा से निकलकर गोमती नदी मोहम्मदी से होकर बाया सीतापुर से लखनऊ जाती है, जिसके बाद वाराणसी के निकट सैदपुर (कैथी) में गंगा नदी में मिल जाती है। जनपद में इसका बहाव 45 किमी की दूरी में है। गोमती का पानी राजधानी लखनऊ के लिए एक तरह से लाइफलाइन माना जाता है तो वहीं धार्मिक स्नान के लिहाज से इसका काफी महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार गोमती गुरु वशिष्ठ की पुत्री हैं। ऐसा कहा जाता है कि एकादशी को इस नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है। श्रीमद्भागवत गीता में भी इसे मोक्षदायिनी बताया गया है।