महिला अस्पताल की निष्प्रयोज्य बिल्डिंग सीएचसी स्टाफ के लिए मुसीबत बनी हुई है। परिसर में ही आवास होने के कारण सीएचसी के डॉक्टर गंदगी और जलभराव के बीच रहने को मजबूर हैं। वहीं पर टीकाकरण केंद्र भी स्थित है, जिससे नौनिहालों में भी संक्रमण होने का खतरा बना हुआ है। इसकी साफ सफाई को लेकर न तो पालिका प्रशासन गंभीर है और न ही सीएचसी प्रशासन।
करीब दस साल पहले सीएचसी बिल्डिंग बनने के बाद सालों पुराने महिला अस्पताल को उसमें शिफ्ट कर दिया गया, जबकि परिसर में ही सीएचसी स्टाफ के लिए आवास और टीकाकरण केंद्र स्थित है। देखरेख के अभाव में परिसर गंदगी का अड्डा बन गया है। इससे वहां पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में सीएचसी स्टाफ का आवासों में रहना दुश्वार हो गया है। वहीं टीकाकरण केंद्र होने के कारण टीका लगवाने के लिए आने वाले बच्चों में भी संक्रमण होने का खतरा बना रहता है। इस सबके बावजूद परिसर की साफ सफाई को लेकर न तो सीएचसी प्रशासन ही चेत रहा है और न ही पालिका प्रशासन ही।
मंगलवार और शनिवार को होता है टीकाकरण
टीकाकरण केंद्र होने के कारण क्षेत्र की गर्भवती महिलाएं और प्रसूताएं अपने बच्चों का टीकाकरण कराने के लिए आती हैं। गंदगी और जलभराव के कारण महिलाओं और बच्चों में संक्रमण होने का खतरा बना रहता है। एएनएम आशा दीक्षित और कौशल्या का कहना है कि गंदगी के कारण बैठना मुश्किल होता है।
अवैध वाहनों और नशेड़ियों का अड्डा बना जर्जर भवन
महिला अस्पताल का जर्जर भवन जहां नशेड़ियों का अड्डा बन गया है वहीं परिसर पर तांगा व चार पहिया वाहन चालकों ने कब्जा कर लिया है। इससे परिसर अवैध पार्किंग स्थल बनकर रह गया है, जिससे टीकाकरण के लिए महिलाओं व आवास पर आने जाने के लिए डॉक्टरों को मुसीबत उठानी पड़ती है।
सफाई कराने के लिए कई बार पालिका प्रशासन को सूचना दी, लेकिन सफाई नहीं हुई। वैसे विधायक जी ने महिला अस्पताल परिसर पर ट्रामा सेंटर और 100 बेड का अस्पताल बनाने का प्रस्ताव भेजा है, जिसका सर्वे हुआ है। इसके बनते ही सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
डॉ. सुरेंद्र कुमार, अधीक्षक सीएचसी