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खेतों में पुआल जलाया तो जेल के साथ भुगतना पड़ सकता है जुर्माना

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आग - फोटो : अमर उजाला
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निघासन। किसानों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। खेतों में भूसा और पुआल आदि जलाने वाले किसानों पर अब जुर्माना लगेगा। एक बार जुर्माने के बाद अगर फिर यही काम किया तो जुर्माने के साथ जेल भी जाना पड़ सकता है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण एनजीटी के सख्त रुख और आदेशों के बाद यूपी सरकार ने तहसीलदार को इस कार्रवाई के लिए अधिकृत किया है।
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तहसीलदार पूरण सिंह राणा ने बताया कि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को देखते हुए एनजीटी ने दिसंबर 2015 और नवंबर 2016 में दिए अपने दो फैसलों में कहा था कि दिल्ली, एनसीआर और पश्चिम के कई जिलों में छाई धुंध से लोगों को काफी तकलीफ हुई है। एनजीटी ने फैसला देते हुए खेतों में कृषि अपशिष्ट जलाने वालों पर जुर्माने और सजा का प्रावधान किया है। इसी सिलसिले में प्रदेश सरकार के कृषि विभाग ने आठ नवंबर 2016 को जारी शासनादेश में कृषि अपशिष्टों को जलाना निषेधित करके ऐसे मामलों की मासिक और पाक्षिक समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दुबे की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कृषि अपशिष्टों को जलाने की सूचना ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत स्तर के कर्मचारी चौबीस घंटे के भीतर तहसीलदार और उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी को देंगे। उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी इनको तहसीलदार को भेजेंगे। लेखपालों व कृषि प्रसार अधिकारी से प्राप्त सूचनाओं की जांच तहसीलदार नायब तहसीलदार से कराएंगे। नायब तहसीलदार आरोपी और संबंधित कर्मचारी को सुनकर तहसीलदार को आख्या देंगे। तहसीलदार आरोपी को सुनने के बाद दो एकड़ से कम जमीन वाले किसानों से ढाई हजार रुपये प्रति घटना, दो से पांच एकड़ वाले से पांच हजार और पांच एकड़ से ज्यादा जमीन वाले किसान से पंद्रह हजार रुपये प्रति घटना पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलेंगे।
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