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25 फीसदी गेहूं नहीं खरीद सकीं सरकारी एजेंसियां

Sat, 18 Jun 2016 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
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गेहूं - फोटो : अमर उजाला
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2.16 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का था लक्ष्य
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6124 किसानों से 52754.79 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा
जिले में सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद 15 जून से बंद हो चुकी है, लेकिन इस बार गेहूं खरीद पिछले वर्षों के मुकाबले बहुत ही कम रही है। सरकारी लक्ष्य दो लाख 16 हजार 500 मीट्रिक टन के सापेक्ष 52754.79 मीट्रिक टन यानी 24.37 फीसदी गेहूं खरीद हुई है। यह पिछले कुछ सालों में गेहूं खरीद करने वाली एजेंसियों का सबसे खराब प्रदर्शन है। हालांकि अधिकारियों के तर्क हैं कि खुले बाजार में कीमतें बढ़ने से क्रय केंद्रों की ओर किसानों ने रुख ही नहीं किया। 
रबी विपणन वर्ष 2016-17 में किसानों से गेहूं खरीद करने के लिए नौ एजेंसियों के 137 क्रय केंद्र स्वीकृत हुए थे, जिसमें विभाग का दावा है कि 135 केंद्र क्रियाशील रहे। एक अप्रैल से 15 जून तक सरकार ने एजेंसियों को 1525 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दो लाख 16 हजार 500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। पुराने ढर्रे की तर्ज पर ही शुरुआत में क्रय केंद्र देरी से खुले और जो खुले भी तो वहां पैसा न होने की बात कहकर किसानों को टरकाया गया। अप्रैल के आखिर सप्ताह से गेहूं खरीद ने रफ्तार पकड़ी, लेकिन मई का पहला पखवाड़ा बीतते ही खरीद लगभग बंद सी हो गई। इसका अंदाजा ऐेसे भी लगाया जा सकता है कि 14 मई तक 51580.72 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हुई, जिसके बाद एक माह में (15 जून) तक 52754.79 मीट्रिक टन पर खरीद बंद हो गई। 
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एजेंसीवार गेहूं खरीद 
नाम                   लक्ष्य        खरीद 
खाद्य विभाग          13500      5092.35
एसएफसी             17600      3657.53
कल्याण निगम        17500       3127.95
पीसीएफ              96500      26111.66
यूपीएसएस            36300       3008.55
यूपी एग्रो                4500        450.00
एनसीसीएफ             7600       2811.85
नैकाफ                   6500         60.00
एफसीआई             16500        8434.90

6124 किसानों को 80.45 करोड़ भुगतान
सरकारी क्रय केंद्रों पर हुई 24.37 फीसदी गेहूं खरीद 6124 किसानों से की गई है। इसके एवज में एजेंसियों ने किसानों को 80 करोड़ 45 लाख 10 हजार रुपये भुगतान किया है। 
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खुले बाजार में गेहूं की कीमतें समर्थन मूल्य से अधिक हो गईं, जिसके बाद बाजार चढ़ती रही। इससे किसानों ने क्रय केंद्र पर जाने के बजाय मंडियों में आढ़तियों के हाथ गेहूं बेचने में फायदा समझा। दूसरा कारण यह भी है गेहूं की क्वालिटी अच्छी होने के कारण बीज बनाने के लिए दूसरे प्रांतों से खरीदार भी आए। 
-कौशल देव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी 
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