पिंजड़े के इर्दगिर्द चक्कर लगाता रहा बाघ, नहीं हुआ कैद
बकरी मिली सुरक्षित, रात में फिर पिंजड़े में बांधी जाएगी
अमर उजाला ब्यूरो
ममरी। दुधवा नेशनल पार्क से आई एक्सपर्ट टीम और वनरेंज मोहम्मदी महेशपुर के वनकर्मियों द्वारा देवीपुर बीट जंगल से सटे परबस्त नगर गांव के पास दहशत का पर्याय बने बाघ और तेंदुए को पकड़ने के लिए जो पिंजड़ा लगाया उससे कोई भी सफलता टीम के हाथ नहीं लगी है। वनकर्मियों के अनुसार पिजड़े में बंधी बकरी को निवाला बनाने के लिए बाघ रात भर पिंजड़े की आसपास चक्कर लगाता रहा, जिसकी पुष्टि सुबह मिले पगचिन्हों से हुई है। बताया कि पिंजड़े में शाम को फिर बकरी बांधी जाएगी।
रेंजर बनारसी दास शाक्य ने बताया कि किसानों के विरोध पर दो दिन से गन्ने के खेतों में बंद रही कांबिंग फिर शुरू करा दी है। बताया कि दुधवा पार्क से आई टीम, एसटीपीएफ के जवान और वनकर्मी अब गंगाकली हथनी को गन्ने में घुसाने के बजाए कठिना नदी और जंगल के किनारे घुसा रहे हैं। स्पर्ट टीम, एसटीपीएफ जवान, वनकर्मी चौपहिया वाहनों से हथनी के साथ चल रहे हैं। बताया कि एक तरफ टीम बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए अयोध्यापुर, मुल्लापुर, सुंदरपुर, घमहाघाट के पास कांबिंग कर रही है, दूसरी तरफ दहशत का पर्याय बने बाघ और तेंदुए को पकड़ने के लिए परबस्तनगर और जंगल के बीच शुक्रवार की शाम पिंजड़ा लगा दिया गया था। पिंजड़े में बंधी बकरी को निवाला बनाने के लिए बाघ पिजड़े के आस पास चक्कर लगाता रहा। सबेरे बकरी पिजड़े में सुरक्षित मिली, जबकि बाघ के पगचिन्ह पिंजड़े से कुछ दूरी तक बने मिले।
रेंजर और वनरक्षक राजेश कुमार ने बताया कि रात लगभग नौ बजे पिजड़े में बकरी फिर बांधी जाएगी। जिसकी निगरानी में एक्सपर्ट टीम, एसटीपीएफ के जवान, वनकर्मी सरदार लालसिंह के झाले पर मौजूद रहेंगे। जो पिंजड़े की मानीटरिंग करेंगे। उधर डब्ल्यूटीआई टीम अपना काम कर रही है।