खेत में दिखा बाघ, जान बचाकर भागे मजदूर
गुलरिया। उत्तर खीरी वन प्रभाग की बिजुआ बीट इलाके में गन्ने की पत्ती काट रहे मजदूरों ने खेत में बैठे बाघ को देखो तो उनके होश फाख्ता हो गए। मजदूरों ने जैसे तैसे भाग कर जान बचाई।
बस्तौली गांव के पूर्व प्रधान विनोद कुमार शुक्ला के खेत में गांव के ही प्रभूदयाल कश्यप, अनिल कश्यप लाला, दिवाकर और जितेंद्र कुमार मिश्रा मजदूरी करने सोमवार को गए थे। दोपहर करीब दो बजे मजदूरों ने खेत में बाघ देखा तो भगदड़ मच गई। शोर मचाकर उन्होंने गांव के लोगों को भी जानकारी दी। खेत स्वामी विनोद कुमार ने आनन फानन बाध होने की सूचना वन विभाग को दी। उधर तिखड़ा निवासी राजकुमार गौतम ने बताया कि सुबह उनके खेत में भी शावक दिखाई पड़ा था। शुक्रवार को इसी गांव में तरनदीप सिंह के गन्ने के खेत में नीलगाय के बच्चे का बाघ ने शिकार किया था। तिखडा से बस्तौली की दूरी लगभग पांच किलोमीटर है। संभावना जताई जा रही है कि तिखड़ा में शिकार करने वाला बाघ बस्तौली पहुंच गया है। बाध की दहशत से किसानों को खेतों में काम करना मुश्किल हो गया है। सूचना के बाद भी वन विभाग का कोई अधिकारी-कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा।
मोहम्मदी रेंज में जंगल से ज्यादा बाहर टहल रहे हैं बाघ
क्रासर
कठिना नदी किनारे खेतों को बाघ ने बनाया ठिकाना
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। जून माह की 18 तारीख को एक इंसान की जान लेने के बाद बाघ लगातार कठिना नदी के किनारे खेतों में अपना ठिकाना बनाए हुए है। कभी नीलगाय का शिकार कर तो कभी लावारिस पशु को खाकर वह अपनी भूख मिटा रहा है। इस बीच कई बार ग्रामीणों का भी बाघ से आमना सामना भी हुआ लेकिन संयोग से बाघ ने किसी पर हमला नहीं किया।
ग्लोबल टाइगर डे पर कठिना नदी किनारे विचरण कर रहे बाघ ने रविवार सुबह एक लावारिस गाय को निवाला बनाकर एक बार फिर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। अयोध्यापुर, सुंदरपुर और इब्राहिमपुर के मध्य फस्ट रोड किनारे आबादी के निकट गन्ने के खेत में हुई इस घटना के बाद से ग्रामीणों में दहशत है। पहले ही इस इलाके में बाघ की मौजूदगी जानकर क्षेत्र के लोग खेतों में जाने से डर रहे थे। लावारिस गाय को निवाला बनाने के बाद ग्रामीणों का डर और ज्यादा बढ़ गया है।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग की मोहम्मदी रेंज में कठिना नदी का किनारा बाघों का पसंदीदा प्राकृतिक आवास रहा है। इधर छोटे से जंगल में बाघों की तेजी से बढ़ रही आबादी से बाघों के आवास का संकट पैदा हो रहा है। इसके चलते बाघ जंगल से निकल कर खेतों में अपना ठिकाना बना रहे हैं। अब जंगल और गन्ने के खेतों में कोई खास फर्क रह नहीं गया है। जंगलों में भी खेतों से कम इंसानी दखलंदाजी नहीं है। बाघों को जंगल से ज्यादा भोजन खेतों में मिल रहा है। मोहम्मदी रेंज में नीलगायों की संख्या पर्याप्त है। नीलगायों के साथ-साथ लावारिश घूमने वाले जानवरों के रूप में बाघों को पर्याप्त भोजन मिल रहा है। इसके चलते जो बाघ जंगल से बाहर आते हैं वह वापस जंगल में जाने का नाम नहीं लेते। इस तरह गन्ने के खेत कई बाघों का रहने का क्षेत्र बन चुके हैं। यह बात बाघों की लोकेशन जानने के लिए लगाए गए कैमरों से भी साबित हो चुकी है।
इंसेट
बाघ ने दो माह में तीन पालतू बैलों में दो को मार डाला एक को किया गंभीर घायल, तीन लावारिस जानवरों और एक सियार को बनाया निवाला।
. 18 जून 2018. महेशपुर बीट में देवीपुर गांव के जंगल के पास बाघ ने लावारिस बछड़े को निवाला बनाया।
. 22 जून 2018. मोहम्मदी रेंज के सुभाष नगर गांव के पास बाघ ने एक पालतू बैल पर हमला कर गंभीर घायल किया।
.24 जून 2018. कठिना नदी किनारे लीलापुर फार्म निवासी किसान वसीम के दो पालतू बैलों पर हमला कर मार डाला।
. 7 जुलाई 2018. कठिना नदी किनारे घमहाघाट और सुंदरपुर गांव के निकट बाघ ने एक लावारिस बछड़े को निवाला बनाया।
. 14 जुलाई 2018. सुंदरपुर गांव के पास किसान मान सिंह के गन्ने खेत में बाघ ने एक सियार को बनाया निवाला।
. 29 जुलाई 2018. कठिना नदी किनारे सुंदरपुर गांव के पास गन्ने खेत में बाघ ने एक लावारिश गाय को मार डाला।
वर्जन.....
सुंदरपुर गांव के निकट गन्ने खेत में बाघ ने एक लावारिश गाय पर हमला कर मार डाला है। बाघ की निगरानी बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों से अपील है कि वे सतर्क रहें। ग्रामीण खेतों में अकेले जाने के बजाय समूह में शोर मचाते हुए जाएं। .
-बनारसी दास मौर्य, प्रभारी रेंजर, मोहम्मदी रेंज।
फोटो संख्या 30एलकेएच409
बाघों के बारे में स्कूली बच्चों, ग्रामीणों को दी जानकारी
मझगईं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, करतनिया घाट फांउडेशन एवं दुधवा नेशनल पार्क के सहयोग से भगवंतनगर गुलरा गांव के प्राथमिक स्कूल में टाइगर डे मनाया गया। बच्चों को टाइगर के बारे में विस्तार से जानकारियां दी गईं।
स्कूली बच्चों व ग्रामीणों को जानकारी देते हुए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहायक परियोजना अधिकारी राधेश्याम भार्गव ने बताया कि पूरे भारत में 49 टाइगर रिजर्व क्षेत्र हैं और प्रदेश में इनकी संख्या तीन है। बताया कि इनमें पीलीभीत, अमानगढ़ व दुधवा नेशनल पार्क में 2014 की गणना में बाघों की संख्या 2226 थी और अब बाघों की संख्या 3890 हो गई है। हर चार वर्ष बाद कैमरा से बाघों की गणना की जाती है। परियोजना अधिकारी ने बताया कि 49 टाइगर क्षेत्र में 350 जलाशय हैं, जहां पर बाघों का वास स्थल होता है। भारत में मुख्य रूप से पाया जाने वाला रायल बंगाल टाइगर है। उन्होंने इस मौके पर पर्यावरण को बचाने के लिए ग्रामीणों व स्कूली बच्चों से एक-एक वृक्ष लगाने की शपथ दिलाई। यहां पर पार्क की गुलरा चौकी के दरोगा प्रताप सिंह, बरातीलाल चौहान, प्रधान नरेंद्र सिंह लाडी, श्याम बाबू शुक्ला, छविनाथ चौहान, अरविंद तिवारी, जगमोहन, अनुराग शुक्ला के साथ स्कूल स्टाफ व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।