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जेल में निरुद्ध एमआई बर्खास्त, ठेकेदार बचा

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लखीमपुर खीरी। गेहूं खरीद वर्ष 2017 में सुंदरवल स्थित खाद्य विभाग के क्रय केंद्र से 40.64 लाख रुपये का भुगतान गेहूं खरीद के नाम पर कर दिया गया, लेकिन उस मूल्य का गेहूं गोदाम तक नहीं पहुंचा। इस मामले में तत्कालीन डिप्टी आरएमओ कौशल देव ने फूलबेहड़ थाने में केंद्र प्रभारी/ एमआई पंकज त्रिपाठी और ठेकेदार टीएन मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। करीब दो साल तक चली जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी एमआई पंकज को तो जेल भेज दिया, लेकिन ठेकेदार के खिलाफ अभी कोई कार्रवाई नहीं की है। इसके बाद खाद्य विभाग के आयुक्त आलोक कुमार ने एमआई को दोषी मानते हुए बर्खास्त कर दिया और 40 लाख रुपये रिकवरी के आदेश भी दिए हैं।
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फूलबेहड़ क्षेत्र के गांव सुंदरवल स्थित खाद्य एवं रसद विभाग के क्रय केंद्र से मई-जून 2017 में किसानों से खरीदे गया 2205 क्विंटल गेहूं एफसीआई गोदाम नहीं पहुंचा था, जिसकी कीमत 40 लाख 64 हजार रुपये थी। इस केंद्र पर मार्केटिंग इंस्पेक्टर पंकज त्रिपाठी बतौर केंद्र प्रभारी तैनात थे, जबकि हैंडलिंग ठेकेदार टीएन मिश्रा केंद्र से गेहूं को एफसीआई गोदाम तक पहुंचाने का काम देख रहे थे। गबन का मामला सामने आने पर तत्कालीन डिप्टी आरएमओ कौशल देव ने आरोपी ठेकेदार और केंद्र प्रभारी के खिलाफ फूलबेहड़ थाने में गबन का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की जांच सुंदरवल चौकी इंचार्ज सुनील कुमार को सौंपी गई, जिसके बाद प्रभारी निरीक्षक ने जांच की। पुलिस ने निलंबन के बाद कानपुर में अटैच एमआई पंकज को गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे पहुंचा दिया, लेकिन हैंडलिंग ठेकेदार को आंच तक नहीं आने दी। इसके बाद विभागीय कार्रवाई की गाज एमआई पंकज पर ही गिरी है। खाद्य एवं रसद आयुक्त ने नौकरी से बर्खास्त करते हुए 40.64 लाख रुपये की रिकवरी एमआई से कराने के आदेश दिए हैं।

कुल 28191 क्विंटल हुई थी खरीद
सुंदरवल स्थित क्रय केंद्र पर किसानों से कुल 28191 क्विंटल गेहूं खरीदा गया था, जिसके सापेक्ष विभाग ने किसानों को भुगतान भी कर दिया। 2205 क्विंटल गेहूं की डिलीवरी एफसीआई में नहीं पहुंचने पर मामला पकड़ा गया, जिसके बाद दोनों आरोपी फरार हो गए थे।
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तो विभाग ने भी ठेकेदार को दी राहत
तत्कालीन डिप्टी आरएमओ ने आरोपी ठेकेदार का करीब 12 लाख रुपये का भुगतान रोक दिया था, जिससे गबन की धनराशि की भरपाई की जानी थी। इसके बाद जांच लंबी होती गई, वैसे ही एमआई पर शिकंजा कसता रहा, लेकिन ठेकेदार बेदाग होता गया।

कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी
ठेकेदार ने खुद को बचाने के लिए स्टे आर्डर हासिल कर लिया था, जिसके बाद कोर्ट से हाल में ठेकेदार की गिरफ्तारी का वारंट जारी कराया गया है। करीब एक सप्ताह पहले इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई है, जिसके चलते ठेकेदार की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। -घनश्याम राम, प्रभारी निरीक्षक, फूलबेहड़
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