लखीमपुर खीरी। बिना आतिशबाजी दिवाली मनाने की कल्पना नहीं की जा सकती। लक्ष्मी पूजन के बाद पटाखे फोड़ने की परंपरा है। पटाखे की धमक हर किसी के चेहरे पर मुस्कान जरूर लाती है, लेकिन यही पटाखे हवा में जहर घोलकर हम सभी को नुकसान पहुंचाते हैं। पिछली दिवाली पर शहर का ध्वनि और वायु प्रदूषण इतना बढ़ गया था कि लोग इसे महसूस करने लगे थे। वैसे तो शहर में प्रदूषण मापने की कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन तराई के इस जिले में जरा सा भी वातावरण प्रदूषित हो तो आभास होने लगता है। पिछली दिवाली वायु प्रदूषण का आभास करा गई थी। आतिशबाजी का नुकसान यह भी है कि पटाखा दगाते समय चोट भी लग सकती है। इसलिए पटाखों से दूर रहने की कोशिश करें। अगर पटाखे जला भी रहे हैं तो थोड़ी सावधानी बरतें। दीपावली पर सगुन के रूप में फोड़े जाने वाले पटाखे मौत का सामान बनते जा रहे हैं। पटाखों से निकलती रंगबिरंगी रोशनी और चमक से लोगों के चेहरे पर मुस्कान जरूर लाती है। पटाखों से निकलने वाली हानिकारक गैस सें मानव के लिए खासी नुकसानदेह साबित होती है। वहीं प्रकृति के लिए भी घातक है।
पटाखे जलाते समय यह बरतें सावधानियां
- पटाखे जलाते समय कसे हुए कपड़े पहने। फुस हुए पटाखे को दोबारा मत उठाने जाएं। विस्फोटक कभी भी हाथों में ना रखें। पटाखों को दीये या मोमबत्ती के आसपास ना जलायें।
- बच्चों को अकेले पटाखे न छुड़ाने दे। उनके साथ अभिभावक अवश्य मौजूद रहें।
- पटाखे खुले स्थानों पर छुड़ाए। दो बाल्टी पानी अवश्य भरकर रखें।
- झुग्गी झोपड़ी के आस-पास पटाखे न जलाए।
- घर में बिजली की झालर लगाते समय ध्यान रखें कि तार कहीं से कटा न हो। यदि कहीं कटा हो तो उस पर टेपिंग कर दें।
- कपड़ा या प्लास्टिक के सामन के आसपास मोमबत्ती न लगाएं।
- पटाखे जलाते समय चप्पल या जूते जरूर पहनें।
- घर के अंदर या बंद स्थान पर पटाखे ना जलायें।
- पटाखे छोड़ते समय अपने चेहरे को दूर रखें। जल जाने पर पानी के छीटें मारें।
आतिशबाजी के दौरान आंखों का रखें ख्याल
आतिशबाजी के दौरान आंखों का विशेष ख्याल रखें। पटाखा जलाते समय आप चश्मे का उपयोग कर सकते हैं। आंख में चोट लगने पर ठंडे पानी से लगातार 15 मिनट आंख को धोए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर को तुरंत दिखाएं।
युवा बोले, हम भी समझते हैं पटाखे नुकसान दायक पर इस पर राजनीति न हो
रात्रि दस बजे के बाद पटाखे न दगाने के अदालत के आदेश के बाद इसको लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ ने कहा कि पटाखे न छोड़ने की सलाह देने वाले परंपरा को खत्म करना चाहते हैं। अमर उजाला ने प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की तो ज्यादातर ने कहा कि धार्मिक परंपराओं टिप्पणी अब आम बात हो गई है। होली आती है, तो पानी बचाने की बात होने लगती है, दिवाली पर पटाखे न फोड़ने के संदेश शुरू हो जाते हैं। अब क्या होली और दिवाली न मनाएं। कई युवाओं ने यह भी कहा कि वह तो हमेशा अतिशबाजी से दूर रहते हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: एसपी
दीपावली को लेकर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस फोर्स लगाया गया है। सभी सीओ, थाना प्रभारियों सीओ और एएसपी को निर्देश दिए गए हैं कि वह छोटी से छोटी घटना पर नजर रखें। संदिग्धों और हुड़दंगियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
रामलाल वर्मा, एसपी।