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अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में अभी संसाधनों का है टोटा

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अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में हिंदी की किताबों से शिक्षा
क्रासर.......
टाटपट्टी पर बच्चों को बैठाकर करा रहे पढ़ाई
शिक्षकों ने अपने बलबूते बदली विद्यालय की तस्वीर
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। प्रदेश सरकार के आदेश पर जनपद के 75 प्राथमिक विद्यालयों को जैसे तैसे अंग्रेजी माध्यम से संचालित तो करा दिया गया, लेकिन उनमें अभी तक आवश्यक सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से इनके कायाकल्प को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इन विद्यालयों की कमान संभाले शिक्षकों ने ही अपने प्रयासों से बदलाव की मुहिम जरूर छेड़ी, जिससे कुछ हद तक भवन और परिसर के हालात बदलने में सफलता मिली है। इसके बावजूद अभी भी जमीनी स्तर पर काफी काम होना शेष है। बच्चों को टाटपट्टी पर बैठाया जा रहा है। बच्चों को अंग्रेजी माध्यम किताबों का वितरण भी नहीं हुआ है, बल्कि हिंदी माध्यम की किताबों से अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा देने का अनूठा प्रयोग चल रहा है।
बेहजम ब्लाक के गांव रतसिया के प्राथमिक विद्यालय में पिछले वर्ष 70 बच्चे नामांकित थे, लेकिन अप्रैल 2018 में अंग्रेजी माध्यम से संचालित होने के बाद से विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़कर 230 हो गई है। यहां पर प्रधानाध्यापक प्रमोद वर्मा, सहायक अध्यापक क्षमा यादव, श्यामकिशोर और बरखा अग्रवाल की तैनाती है और दो शिक्षा मित्र किरन भार्गव और अमिता दीक्षित कार्यरत हैं। प्रधानाध्यापक प्रमोद वर्मा ने बताया कि अंग्रेजी माध्यम विद्यालय होने के बाद विभाग से कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई, बल्कि शिक्षकों ने अपने बलबूते व्यवस्थाओं को बदलने का बीड़ा उठाया। इसमें पूर्व इंचार्ज प्रधानाध्यापक क्षमा यादव ने विद्यालय की तस्वीर बदलने में अहम योगदान दिया। इसके बाद ग्रामीणों में अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए उम्मीद की किरण नजर आई है, जिसके बाद बच्चों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले तीन गुना से अधिक बढ़ गई है।
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सुविधाएं मिलें तो कान्वेंट स्कूलों को दे सकेंगे मात
अभी इन विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की भांति फर्नीचर, पेयजल, शौचालय आदि की व्यवस्था अपग्रेड नहीं हुई है। परंपरागत तरीके से दी जाने वाली सुविधाएं ही बच्चों को मिल रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पांच माह बीतने पर भी बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की किताबें उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। इससे शिक्षकों को भी पढ़ाई कराने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है, तो वहीं बच्चों और उनके अभिभावकों में निराशा है।
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बाक्स=वर्जन.......
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षक अच्छी परफार्मेंस दे रहे हैं। सरकार की ओर से इन विद्यालयों के कायाकल्प के लिए कोई फंड नहीं मिला है। अंग्रेजी माध्यम किताबों की आपूर्ति मिल गई है, जिनका सत्यापन कराने के बाद वितरण शुरू कर दिया गया है। जल्द ही सभी स्कूलों के बच्चों को किताबें मिल जाएंगी।
बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए
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