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मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने का अब एलर्ट मैसेज

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मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने का अब अलर्ट मैसेज
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दुधवा टाइगर रिजर्व में की अनूठी पहल
जुटा रहे जंगल के किनारे बसे ग्रामीणों के मोबाइल नंबर
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने और लोगों को जागरूक करने के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व ने अनूठी मुहिम शुरू की है। इसके तहत जंगल से सटे गांवों में बसे ग्रामीणों को वन विभाग अलर्ट वाइस और टेस्ट मैसेज भेजेगा। बाघ और तेंदुआ जैसे हिंसक वन्यजीवों के आबादी के निकट आने की स्थिति में गांव के लोग क्या करें। इस बारे में वन विभाग इन वाइस और टेस्ट मैसेज के जरिए ग्रामीणों को बताएगा। उत्तर प्रदेश में यह मुहिम पहली बार शुरू की जा रही है। पायलट तौर पर दुधवा टाइगर रिजर्व का चयन किया गया है।
बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के मद्देनजर प्रदेश के वन विभाग ने रिलायंस फाउंडेशन के साथ मिलकर यह मुहिम शुरू की गई है। इसके तहत जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों के मोबाइल नंबर जुटाए जा रहे हैं। यह मोबाइल नंबर दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन के जरिए मुख्य वन संरक्षक (प्रचार-प्रसार) को भेजे जाएंगे। इन मोबाइल नंबरों पर रिलायंस फाउंडेशन के माध्यम से लोगों को वाइस और टेस्ट मैसेज भेजे जाएंगे। पहले चरण में उन गांवों के नंबर एकत्र किए गए हैं जो गांव मानव-वन्यजीव संघर्ष से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं या मौजूदा समय में इससे प्रभावित हैं।
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वाइस और टेस्ट मैसेज के जरिए गांव के लोगों को यह बताया जाएगा कि वन्यजीवों के आबादी के निकट आने पर वे क्या करें। किस तरह बचाव करें कि खुद भी सुरक्षित रहें और वन्यजीव को भी कोई नुकसान न पहुंचे। ग्रामीणों को मैसेज के जरिए संबंधित रेंजर और बीट इंचार्ज का फोन नंबर बताते हुए उनसे अनुरोध किया जाएगा कि हिंसक वन्यजीवों के जंगल से बाहर या आबादी के निकट आने पर उनके मोबाइल पर सूचना दें। साथ ही टोलफ्री नंबर 1926 या डायल 100 को भी सूचित कर सकते हैं। इसके साथ ही जंगल या आसपास होने वाली अवांक्षित गतिविधियों के बारे में भी विभाग को सूचित करने को कहा जाएगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व में शामिल दुधवा नेशनल पार्क, कतर्निया घाट और दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में यह अभियान शुरू किया गया है। इसके लिए मोबाइल नंबर एकत्र कर भेजने का काम शुरू हो चुका है। अब तक सोनारीपुर, बौधिया कलां और मैलानी रेंज के आसपास बसे आधा दर्जन गांवों के लोगों के मोबाइल नंबरों की सूची वन विभाग को भेजी जा चुकी है। ग्रामीणों के नंबर जुटाने का काम तेजी से जारी है।
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मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित हैं यह इलाके
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के तहत मैलानी रेंज, दक्षिण निघासन, उत्तर निघासन, पलिया और संपूर्णानगर रेंज के आसपास के इलाके मानव-वन्यजीव संघर्ष की दृष्टि से काफी संवेदशील रहे है। मैलानी रेंज में तो पिछले तीन साल के अंदर करीब 15 लोगों की बाघ के हमले में मौत हो चुकी है और पच्चीस से अधिक लोग बाघ हमले में घायल हुए हैं। मैलानी रेंज के छेदीपुर गांव में एक बाघ ने छह लोगों की जान ले ली थी। दक्षिण निघासन रेंज के सहतेपुरवा गांव में बाघिन द्वारा एक ग्रामीण को निवाला बनाने के बाद गांव के लोगों ने बाघिन को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया था।
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मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने और लोगों को वन्यजीवों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व में एलर्ट मैसेज सिस्टम शुरू किया जा रहा है। इसके लिए ग्रामीणों के मोबाइल नंबर नंबर जुटाए जा रहे हैं। इससे अच्छे परिणाम मिलने की उम्मीद है।
- रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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