लखीमपुर खीरी। दशहरा मेला के ऐतिहासिक सांस्कृतिक मंच पर स्व. भोलानाथ शेखर की स्मृति में प्रादेशिक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आलोक सीतापुरी की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि एसडीएम सदर नागेंद्र सिंह और विशिष्ट अतिथि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बीपी सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
डॉ. आलोक मिश्र द्वारा पेश की गई वाणी वंदना के बाद दूर-दूर से आए कवियों ने नवरस की गागर छलकाई। हरदोई से आए ओज कवि देवेश तिवारी ने पढ़ा- खेल-खाल कर तोड़ देंगे भारतीय, तुम चीनी सिर्फ चीनी मिट्टी के खिलौने हो। रायबरेली के नीरज पांडेय ने कहा कि चमन विरोधी सब खर पतवारों को साफ किया जाए, जो है देश विरोधी उन्हें न हरगिज माफ किया जाए। इसी क्रम में राज किशोर पांडेय प्रहरी ने देशद्रोहियों को ललकारा संस्कृति के सनातन दुर्ग को ढहने नहीं देंगे। विदेशी धर्म रोधी तक्षकों को देश में रहने नहीं देंगे।
संजीव मिश्र व्योम का गीत बुरा सुनो ना, बुरा कहो ना बुरा ना देखो प्यारे, बापू आज तुम्हारे बंदर कहां खो गए सारे। गीतकार शिव किशोर तिवारी खंजन ने कहा कि जिनके दर्द सीने में न वो बेदर्द होते हैं, सुदामा से लिपटकर तभी घनश्याम रोते हैं। नीरज मिश्र ने कहा- तुम्हारे प्यार का बंधन बड़ा अनमोल रिश्ता है, मां दुनिया माने न माने तू धरती का फरिश्ता है। आशुतोष श्रीवास्तव ने पढ़ा माना जग ज्वाला में जलना हम सबकी मजबूरी है, एक बार फिर हंसे हंसकर उठना बहुत जरूरी है।
डॉ. आलोक मिश्र बोले बुजुर्गों का यह कहना है यही अनुभव भी कहते हैं, जहां विश्वास श्रद्धा हो वहीं भगवान रहते हैं। सतीश मधुप बोले इबादत भी यहीं करनी यहीं चादर चढ़ानी है, शहीदों की समाधि पर मुझे धुनी रमानी है। इसके अलावा कमलेश धुरंधर, राजेंद्र प्रसाद तिवारी कंटक, अखिलेश द्विवेदी, सत्येंद्र द्विवेदी, ज्ञानेंद्र वत्सल, आशुतोष जय, शशांक पांडेय, चंदन तिवारी, नितिन पांडेय, पुनीत, मधुर, अनुराग, प्रभात स्वरस, कमल पांडेय, शिवा अवस्थी, पूनम भार्गव, मयंक मोहन ने काव्य पाठ किया।
इस मौके पर राम गोपाल, युवराज शेखर, राज कुमार त्रिवेदी, डॉ. दयानंद शुक्ल, बाबूराम अवस्थी, शिवकांत, जय प्रकाश मिश्र आदि मौजूद रहे।