दशकों से जंगल में रह रहे थारू जनजाति के लोगों को वहां से हटाकर राजस्व ग्राम में बसाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। परियोजना निदेशक डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने थारू जनजाति के परिवारों को पुनर्वासित करने के लिए एसडीएम पलिया को पत्र भेजा है और जमीन तलाशने को कहा है।
थारू जनजाति के लोग देश की आजादी से पहले से जंगल के वनग्रामों में रह रहे हैं। अब तक इन्हें वनग्राम में ही प्रशासन की ओर से योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। वनग्राम में रहने वाले ज्यादातर कच्चे घरों में रह रहे हैं। पीडी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अब इन्हें वनग्राम से राजस्व ग्राम में बसाया जाएगा। इसके लिए सर्वे कर जमीन की तलाश करने को कहा गया है। उनके मुताबिक जमीन मिलने पर थारू जनजाति के परिवारों को लोहिया आवास योजना का फायदा दिलाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। जिसके बाद थारू जनजाति के लोगों को पक्का मकान बना कर दिया जाएगा। पीडी के मुताबिक जिन गांवों के लोगों को पुनर्वासित करना है, उनमें सूरमा गांव के 179 घर, गोबरौला के 57, सारभूसी के 48, सिकलपुरा के 36, किशननगर के 24, गोलबोझी के 57, किशनपुर के 544 और कांप गांव के 927 घर शामिल हैं। प्रशासन की मंशा है कि थारू जनजाति के परिवारों को जल्द से जल्द वनग्राम से राजस्व ग्राम में बसाया जाए। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।