निघासन। कई दिनों से ठंड से कांप रहे खेतिहर मजदूर की रविवार को मौत हो गई। सूचना के बाद भी तहसील प्रशासन मौके पर नहीं पहुंचा। परिवार वालों ने शव का अंतिम संस्कार करा दिया है। आरोप है कि 15 दिन पहले गांव के ही प्रेमसागर ने कंबल देने के लिए लेखपाल को मृतक का नाम लिखाया था, लेकिन उसे कंबल नहीं दिया गया।
गांव बरोठा निवासी विकलांग सुकई ने बताया कि उसका छोटा भाई 55 वर्षीय प्यारे लाल विवाह न होने के कारण प्रधान से मिले प्रधानमंत्री आवास में अकेला रहता था। ठंड के चलते उसकी तबीयत करीब एक माह पहले खराब हो गई थी। प्राइवेट अस्पताल में इलाज के बाद वह ठीक हो गए थे। ठंड में रजाई आदि की व्यवस्था न होने के कारण मृतक के रिश्तेदार रामगोपाल एक दिन गांव आए थे। कांप रहे प्यारेलाल को रजाई गद्दा दिया था। पड़ोस और परिवार के सदस्य उसे खाना आदि देकर उसका पेट पालते थे। उसके पास ओढ़ने व पहनने के लिए स्वेटर आदि नहीं था। रविवार की सुबह पड़ोस की रहने वाली शांति देवी पत्नी रामचंद्र उसे चाय देने गई। आवाज देने पर भी प्यारे लाल के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। उनका शरीर ठंडा पड़ा था।
सुकई ने बताया कि 17 बिसुआ भूमि होने के कारण वह मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पालते थे। उसके पास पहनने के लिए जूता चप्पल भी नहीं थे। ग्रामीण बाबू, रामचंद्र आदि ने बताया कि दो सप्ताह पहले गांव में प्रधान शत्रोहन लाल शुक्ला ने 10 कंबलों का वितरण कराया था। कंबल न बचने के कारण उसे लाकर देने की बात कही गई थी। गांव के ही प्रेम सागर ने मृतक प्यारे लाल को भी कंबल देने के लिए लेखपाल को नाम लिखवाया था, लेकिन फिर भी उसे कंबल नहीं मिला। उधर, इस बाबत नायब तहसीलदार का कहना है कि मामले की सूचना मिली है। व्यस्तता के कारण नहीं गया था। लेखपाल को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।