लखीमपुर खीरी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद्द किए जाने के बाद से आंदोलित समायोजित शिक्षामित्रों का क्रमिक अनशन सातवें दिन भी हुआ, जिसमें शक्ति प्रदर्शन को लेकर रणनीति बनाई। जुलाई माह के वेतन की मांग को लेकर शिक्षामित्रों ने वित्त एवं लेखाधिकारी और बीएसए कार्यालय पर ताला जड़ दिया। इससे काफी देर तक अफरातफरी का माहौल रहा, क्योंकि बीएसए दफ्तर में बैठे पुलिसकर्मी तालाबंदी के चलते अंदर ही फंसे रह गए। प्रदर्शन के दौरान शिक्षामित्रों ने संबोधन में उग्र तेवर दिखाए। प्रदर्शन में रसोइयों को भी लाने पर जोर दिया गया।
बीएसए कार्यालय परिसर में मंगलवार को भी जिले भर से समायोजित शिक्षामित्र उपस्थित हुए, जिसमें महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही। जिलाध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि शिक्षामित्रों के हक से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार के सामने अपनी मांग मजबूती से रखेंगे, जिसके लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। भविष्य की असुरक्षा से घिरे शिक्षामित्रों ने जुलाई माह के वेतन भुगतान की मांग उठाई, जिस पर अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त होने के बाद ही भुगतान करने की बात कही। इससे भड़के शिक्षामित्रों ने वित्त एवं लेखाधिकारी और बीएसए कार्यालय गेट पर ताला लगा दिया। इस दौरान पुलिसकर्मी अंदर ही बैठे रह गए। सपा जिलाध्यक्ष अनुराग पटेल और महिला जिलाध्यक्ष तृप्ति अवस्थी भी धरना स्थल पर पहुंचे और शिक्षामित्रों के प्रति सहानुभूति जताई।
....और शक्ति प्रदर्शन से पहले स्थगित हुआ धरना
सरकार पर दबाव बनाने के लिए शिक्षामित्रों ने दो अगस्त (बुधवार) को शक्ति प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई थी, जिसमें कई संगठनों के साथ ही रसोइयों के शामिल होने का खाका तैयार किया जा चुका था। शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय से प्रारंभ होकर हीरालाल धर्मशाला से हमदर्द दवाखाना तिराहा होते हुए कचहरी रोड से कलक्ट्रेट पहुंचने का कार्यक्रम बनाया था, जिसकी सूचना अधिकारियों को दे दी गई थी। शाम करीब चार बजे मुख्यमंत्री और शिक्षामित्रों के प्रतिनिधि मंडल के बीच हुई वार्ता के क्रम में धरना प्रदर्शन स्थगित करने की घोषणा कर दी गई। जिलाध्यक्ष राकेश सिंह ने बताया कि सीएम के आश्वासन पर शिक्षामित्र बुधवार से शिक्षण कार्य पर लौटेंगे। 15 दिन का समय मांगा है, जिसके बाद सरकार अपना फैसला सुनाएगी। इसके बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।