जब बाघ हो मेहमान तो रहें सावधान!
लखीमपुर खीरी। बाघ सुरक्षा माह के तहत वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने मन को छू लेने वाला एक प्रभावशाली पोस्टर जारी किया है। इस पोस्टर में बाघ का महत्व बताने के साथ ही बाघों से बचाव के उपाय भी बताए गए हैं। यह पोस्टर जिले में सभी जगह चस्पा किए जा रहे हैं। बाघों केे प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए चल रही बाघ सुरक्षा एक्सप्रेस वैन में भी यह पोस्टर सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
इस पोस्टर के हिस्से में लिखा है मैं हूं सूरमा जिला खीरी का निवासी! आज ही मुझे पता चला कि मेरे गन्ने के खेत में बाघ है फिर भी मैं भयभीत नहीं हूं। तो दूसरे हिस्से में बताया गया कि बाघ गन्ने के खेतों में विचरण क्यों करते हैं। कहा गया कि बाघ एक लुप्तप्राय जीव है। देश के काफी हिस्सों से इसके जंगल नष्ट हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश का तराई क्षेत्र इनका एकमात्र वास है। यहां भी इनके पुराने कई वास स्थल बदल चुके हैं। गन्ने की फसल घास जैसी लंबी, घनी होने के कारण बाघिन अपने बच्चों को इसमें पालना सुरक्षित महसूस करती है।
पोस्टर में यह भी बताया गया है कि बाघ से अपना बचाव कैसे करें। बाघ की लाती, उसका मल या उसका किया गया शिकार आपके खेत में है तो बाघ होने का लक्षण है। खेतों में अकेले काम न करें। काम करते समय चुपचाप न रहें और शोर करते हुए बाघ को अपनी उपस्थिति का अहसास कराएं। संभावित जगहों से बच्चों को को हमेशा दूर रखें। बाघ फसलों को नुकसान करने वाले जंगली जीवों का शिकार करते हैं। यदि हम सतर्क रहें तो बाघ से हमें लाभ है। ग्रामीणों में बाघ सुरक्षा और बचाव के लिए यह पोस्टर काफी प्रभावित कर रहा है। इससे ग्रामीण न केवल जागरूक होकर सतर्क हो रहे हैं बल्कि वन्यजीव और मानव संघर्ष की संभावनाएं भी कम हो रही हैं।
इसके अलावा बाघ सुरक्षा एक्सप्रेस के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बाघ सुरक्षा एक्सप्रेस जहां जाती है वहां मानव और पशु चिकित्सा शिविर भी लगाए जा रहे हैं। इससे ग्रामीणों का वन विभाग से सीधा जुड़ाव हो रहा है। इसके जरिए स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। इसका असर दिख रहा है।