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कर्नाटक के हाथियों की हो रही शाही खातिरदारी
पसंद, नापसंद और मूड का रखा जा रहा पूरा ख्याल
हाथियों के बच्चों की उछल-कूद और शरारतें लोगों को खूब लुभा रहीं
अनिल मिश्र
बांकेगंज। कर्नाटक के बांदीपुर नेशनल पार्क से आए सात वयस़्क और तीन मादा बच्चों की मैलानी के एलीफैंट कैंप में शाही खतिरदारी हो रही है। महावत इन हाथियों की राजकुमार और राजकुमारियों की तरह सेवा में जुटे हैं। मालिश, स्नान, भोजन और भ्रमण में इनकी पसंद- नापसंद और मूड का भी विशेष ख्याल रखा जा रहा है। बेस कैंप में हाथी के बच्चों की उछल-कूद और शरारतें लोगो को खूब लुभा रहीं हैं।
कर्नाटक से आए नर हाथियों नकुल और भास्कर के अलावा मादा वयस्क हाथी अमृता, काविनी, डायना और टरेसा ने यहां के वातावरण और आबोहवा को पूरी तरह अपना लिया है। दुधवा के महावतों की सेवा और उनके व्यवहार ने इन हाथियों का दिल जीत लिया है। कर्नाटक के हाथियों के दल में शामिल तीन बच्चियां पार्वती, कावेरी और सिंगा तो यहां के महावतों और अन्य वनकर्मियों के परिवार के बच्चों की तरह घुलमिल गईं हैं। प्रशिक्षण में ये हाथी पूरी दिलचस्पी ले रहे हैं। आज्ञाकारी और अनुशासित शिष्यों की तरह यह हाथी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। महावतों के इशारे और इनकी भाषा को इन हाथियों ने 15 दिन में ही सीख लिया है। कर्नाटक से इन हाथियों के साथ बाबू, रिजवान, शेख हुसैन, मुहम्मद हिच, मंजूनाथ एस, कलीम पासा, अन्नपा, जेके गणेश, महादेवा, जेआर राजू और रामा आए थे। इनमें राजू, महादेवा, बाबू और रामा वापस कर्नाटक चले गए हैं। अब शेष बचे इन महावतों के दुधवा के महावतों के साथ यह हाथियों की सेवा से लेकर प्रशिक्षण देने तक का काम कर रहे हैं। उसी लगन से हाथी भी नृत्य, खेलकूद, व्यायाम और पेट्रोलिंग आदि का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
नहाने के पहले होती है हाथियों की तेल मालिश
एलीफैंट कैंप में सुबह हाथियों को नहलाने के पहले महावत उनकी सरसों के तेल से जमकर मालिश करते हैं। इसके बाद विशेष रूप से बनाए गए जलाशय के ठंडे पानी में काफी देर तक नहाते हैं और सूढ़ में पानी भरकर एक दूसरे पर डालते हैं। उनकी इस शाही स्नान को देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है।
हाथियों को रोटी नहीं भात है पसंद
कर्नाटक से आए इन हाथियों की पसंद और नापसंद का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। कर्नाटक के हाथियों को भात बहुत पसंद है। ये रोटी नहीं चाहते, इसलिए सुबह नाश्ते में उन्हें खाने के लिए गुड़,भात और मुलायम कुश का हरा चारा दिया जाता है। दोपहर और रात में भी इसी चारे के अलावा पीपल, पाकड़, बरगद की मुलायम टहनियों का चारा परोसा जाता है।
ट्रेनिंग के साथ जंगल की सैर भी
सुबह स्नान और नाश्ते के बाद इन्हें करीब तीन घंटे तक प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही भोजन, पानी और आराम का विशेष ख्याल रखा जाता है। दोपहर बाद उन्हें नियमित रूप से जंगल में सैर के लिए ले जाया जाता है, यह सैर भी उनकी ट्रेनिंग का एक हिस्सा है। इस सैर के बहाने उन्हें जंगल के रास्तों और यहां के वन्यजीवों से परिचित कराया जा रहा है। साथ ही पेट्रोलिंग के तौर तरीके भी सिखलाए जाते हैं।
आज्ञाकारी और अनुशासित विद्यार्थियों की तरह हाथी ले रहे प्रशिक्षण
वन्यजीव प्रतिपालक डीके चतुर्वेदी और एलीफैंट हाउस इंचार्ज ( किशनपुर वन्यजीव विहार) मैलानी रेंज वन क्षेत्राधिकारी नसीम अहमद का कहना है कि कर्नाटक के हाथी अज्ञाकारी और अनुशासित विद्यार्थियों की तरह प्रशिक्षण ले रहे हैं।
वर्जन
हाथियों की सुरक्षा, खानपान और आराम का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। यह हाथी बड़ी ही लगन के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं। 15 दिन में ही इन्होंने काफी कुछ सीख लिया है।
- महावीर कौजलगि, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क।