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हर रोज वाशिंग सेंटर पर बर्बाद
हो रहा लाखों लीटर साफ पानी
अंधाधुंध पानी के दोहन से जिले में गिर रहा भूगर्भ जल स्तर
- अंकुश के लिए कोई नहीं नियमावली, अभी नहीं चेते तो आने वाले दिनों में बन सकती है भयावह स्थिति
अवनीश शुक्ला
लखीमपुर खीरी।
भूगर्भ जलस्तर लगातार गिर रहा है। भूगर्भ वैज्ञानिक भी घटते जल स्तर पर चिंता जताते हुए लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। बावजूद इसके लोग जलदोहन से बाज नहीं आ रहे। इसकी एक बानगी वाशिंग सेंटरों पर देखी जा सकती है, जहां रोजाना सैकड़ों लीटर साफ पेयजल वाहनों को धोने में बर्बाद में किया जा रहा है।
शहर हो या फिर इसके आसपास का क्षेत्र सभी जगहों पर सैकड़ों वाशिंग सेंटर चल रहे हैं। इन सेंटरों पर प्रतिदिन सौ से अधिक छोटे बड़े वाहन धोए जाते हैं। एक दो पहिया वाहन को धोने में करीब सौ लीटर पानी बर्बाद होता है, जबकि एक बड़े वाहन की धुलाई में पानी की मात्रा 300 लीटर तक पहुंच जाती है। हालांकि इन वाशिंग सेंटरों पर अंकुश लगाने के लिए न तो नगर पालिका के पास ही कोई व्यवस्था और न ही जल निगम के अधिकारियों के पास ही।
हर माह नाली में बह जाता है
दो करोड़ लीटर साफ पानी
लखीमपुर शहर और इसके आसपास ही करीब सौ वाशिंग सेंटर हैं। प्रत्येक सेंटर पर रोजाना 25 छोटी और बड़ी गाड़ियां धोई जाती हैं। एक गाड़ी की धुलाई में करीब 250 लीटर साफ पानी खर्च होता है। इस तरह सौ सेंटरों पर रोजाना छह लाख लीटर पानी बर्बाद हो रहा है, जबकि इसकी मात्रा एक माह में करीब एक करोड़ 87 लाख और एक साल में 22 करोड़ 50 लाख लीटर साफ पानी गाड़ियों के धुलाई के रास्ते नालियों में बहाया जा रहा है।
बने नियमावली तो लगे अंकुश
वाशिंग सेंटरों की संख्या कितनी है। इसके आंकड़े न तो नगर पालिका के पास हैं और न ही जलनिगम के। वाशिंग सेंटर खोलने को लेकर कोई नियमावली भी नहीं है, जिसने चाहा उसी ने बोरिंग कराई और वाशिंग सेंटर का काम शुरू कर दिया। शासन की गाइड लाइन न होने के कारण अधिकारी भी इनकी अनदेखी कर रहे हैं।
ये है असल स्थिति
शहर और इसके आसपास स्थित वाशिंग सेंटरों की संख्या- करीब 100
एक सेंटर पर रोजाना धुले जा रहे वाहन-25
एक गाड़ी धुलने में खर्च हो रहा करीब 200 लीटर पानी
जिम्मेदारी निभाने को
तैयार नहीं कोई विभाग
शहर से लेकर गांवों तक में खुल रहे वाशिंग सेंटरों की संख्या कितनी है, इसकी किसी भी विभाग के पास कोई जानकारी नहीं। जलनिगम के अधिशाषी अभियंता अखिलानंद उपाध्याय का कहना है कि हमारे विभाग में इस संबंध में कोई दिशा निर्देश नहीं हैं, लेकिन पालिका को पेयजल के कार्मिशयल प्रयोग पर रोक लगाने के लिए कुछ करना चाहिए। वहीं पालिका ईओ और भूगर्भ जल के अधिकारी भी इस संबंध में कोई गाइड लाइन न होने की बात कह रहे हैं।
भूगर्भ जलस्तर प्रतिदिन घट रहा है। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए समय समय पर जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। वैसे, वाशिंग सेंटरों पर रोक लगाई जानी चाहिए, जिससे स्वच्छ जल की बर्बादी को रोका जा सके।
- रविकांत सिंह, अधिशाषी अभियंता भूगर्भ जल, लखनऊ
वाशिंग सेंटरों पर रोजाना लाखों लीटर साफ पानी बर्बाद कर दिया जाता है। इस पर रोक लगनी चाहिए, लेकिन पालिका के पास इस संबंध में ऐसी कोई नियमावली नहीं है, जिससे इन पर रोक लगाई जा सके।
- अखिलेश त्रिपाठी, ईओ