लखीमपुर खीरी। क्रिसमस अब केवल ईसाईयों तक ही सीमित नहीं रह गया है। इसने सभी जाति, धर्म और संप्रदाय के लोगों में अपनी पैठ बना ली है। शहर में ईसाई समुदाय की आबादी काफी कम होने के बावजूद लोगों में क्रिसमस के प्रति जोश दिख रहा है। क्रिसमस पर इस्तेमाल होने वाले केक, कैंडल, क्रिसमस ट्री, स्टार, जिंगल बेल, सजावटी सामान और सांता क्लॉज के कपड़े सेंटा ट्वॉयज की दुकानें सजी हुई हैं। इन चीजों की बिक्री भी खूब हो रही है। युवाओं और बच्चों में क्रिसमस को लेकर काफी क्रेज है। रविवार को क्रिसमस सामग्री बेचने वाली दुकानों पर दिन भर भीड़ भाड़ बनी रही।
बाजार में केक की हुई रिकार्ड बिक्री
क्रिसमस के लिए विभिन्न फ्लेवर के केक बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें चॉकलेट, बनीला, बटर स्कॉच, स्ट्राबेरी, ब्लैक फॉरेस्ट, जेल केक, जैली केक और फ्रूट केक की काफी मांग रही। केक बनाने वालों ने इस बार क्रिसमस स्पेशल केक निकाला है, जिसकी काफी मांग है। केक 100 रुपये लेकर 2000 रुपये मूल्य तक के बाजार में मौजूद हैं।
प्लम केक की भी
रही अच्छी मांग
वाइन से बनने वाले प्लम केक की डिमांड भी इस बार खूब है। व्हिस्की केक और रम केक के नाम से बिकने वाले केक में रम केक की बिक्री ज्यादा हुई है। शहर में क्रिसमस पर पहली बार प्लम केक बाजार में आया है। दुकानदारों का कहना है कि केक की रिकार्ड बिक्री हुई है। केक की डिमांड इतनी ज्यादा है कि मांग पूरी कर पाने में कठिनाई हो रही है।
क्रिसमस ट्री, जिंगल बेल की हुई रिकार्ड सेल
क्रिसमस ट्री, जिंगल बेल, स्टार, कैंडल, सांता क्लॉज की ड्रेस, सेंटा ट्वायज, प्रभु ईशु के जन्म की झांकी और सजावटी सामान की बिक्री भी खूब हुई। क्रिसमस ट्री 50 रुपये मूल्य से लेकर 300 रुपये तक में बिका तो सेंटा क्लाज की ड्रेस 200 रुपये से 500 रुपये तक में बिकी। इसके अलावा सजावटी सामान, सेंटा ट्वायज, पेस्ट्री आदि भी खूब बिके।
गिफ्ट आइटम्स की मांग रही कम
क्रिसमस पर एक दूसरे को उपहार देने की परंपरा रही है। लोगों में क्रिसमस को लेकर काफी उत्साह रहा लोगों ने जमकर खरीदारी भी की, लेकिन शहर में ईसाई समुदाय के लोगों की संख्या कम होने से गिफ्ट आइटम की बिक्री काफी कम रही। अधिकांश लोगों ने चॉकलेट और ड्राईफ्रूट, खिलौने आदि उपहार देने के लिए खरीदे, जबकि क्रिसमस ग्रीटिंग की खूब बिक्री हुई।
दिन भर चला चर्च की सजावट का काम
क्रिसमस के लिए शहर के चर्चों को भव्यता के साथ सजाया गया। दिन भर लोग चर्च को सजाने में लगे रहे। चर्च को गुब्बारों, स्टार जिंगल बेल और दूसरी सजावटी सामान से सजाया गया। बिजली की रंग बिरंगी झालरों से चर्च सजाए गए। इनके रंगरोगन का काम पहले ही पूरा हो चुका है। आमतौर से सुनसान रहने वाले चर्चों में अचानक रौनक लौट आई है।