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Lakhimpur Kheri News: 1.70 करोड़ फूंके, चार साल बाद भी शिल्पग्राम नहीं शुरू

Tue, 29 Jul 2025 11:52 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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चंदनचौकी में बना ​शिल्पग्राम। स्रोत विभाग
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लखीमपुर खीरी। थारू जनजाति की संस्कृति, भोजन, परिधान आदि को करीब से दिखाने के लिए चंदन चौकी में चार साल पूर्व बने शिल्पग्राम का संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया। इसे बनवाने में 1.70 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। यह कब तक चालू होगा, अफसर स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं।
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दुधवा नेशनल पार्क में देश के ही नहीं, बल्कि विदेश से भी पर्यटक घूमने आते हैं। जंगल की सैर कराने के साथ ही पर्यटकों के ठहरने के लिए दुधवा परिसर में थारू हट बने हैं। सीमा क्षेत्र में थारू जनजाति के लोग भी रहते हैं, जिनका रहन-सहन, खान-पान, पहनावा, बोला-चाल आदि उनकी अनोखी संस्कृति है।
जंगल आने वाले पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों के साथ थारुओं के बीच ठहरने, भोजन, रहन-सहन आदि को करीब से दिखाने के लिए शिल्पग्राम बनाया गया। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि थारू जनजाति को करीब से जानने से पर्यटकों को अच्छा अनुभव मिलेगा। साथ ही थारू जनजाति के लोगों की आय बढ़ेगी और देश-विदेश में उनका नाम होगा। पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी।
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शिल्पग्राम का निर्माण बाॅर्डर एरिया डेवलपमेंट योजना के तहत कराया गया था। वर्ष 2021 में निर्माण पूरा होने के बाद जनजाति विभाग को यह हस्तांतरित हो चुका है। विभागीय अफसर इसको शुरू कराने के लिए प्रयासरत रहे, लेकिन शासन से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। इसके संचालन की जिम्मेदारी नाबार्ड को दी गई है।


ये मिलेंगी सुविधाएं

शिल्पग्राम में थारुओं के उत्पादों के लिए दुकानें और एक प्रशिक्षण केंद्र बनाया गया है। इसका संचालन थारू समाज की एक कमेटी करेगी। इससे होने वाला लाभ भी उन्हीं को दिया जाएगा। शिल्पग्राम में चार थारू हट, एक म्यूजियम, नृत्य कला केंद्र, थारू व्यंजनों के स्वाद के लिए रेस्टोरेंट, पर्यटकों के ठहरने आदि की व्यवस्था रहेगी।


शिल्पग्राम में होने वाली प्रत्येक गतिविधियों को समूह के माध्यम से संचालित किया जाना है। समूहों का गठन हो रहा है। प्रशिक्षण सहित अन्य प्रक्रिया कराई जाएंगीं। संभवत: इस सत्र से ही चालू होने की उम्मीद है।
-यूके सिंह, परियोजना अधिकारी जनजाति विभाग



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एक एजेंसी नामित कर क्षेत्रीय कार्यालय को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। स्वीकृति मिलने पर प्रशिक्षण सहित अन्य प्रक्रिया पूरी कर इसे चालू करा दिया जाएगा। इस तरह का यह पहला प्रोजेक्ट है, इस वजह से थोड़ा समय लग रहा है।
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-प्रसून सोनार, डीएमएम नाबार्ड
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