लखीमपुर खीरी। लखीमपुर डिपो के नए बस अड्डे और वर्कशॉप के लिए जिला प्रशासन ने एक साल पहले 17 बीघा जमीन उपलब्ध करा दी थी। रोडवेज निगम ने जमीन पर कब्जा भी ले लिया, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
प्रस्ताव समेत निर्माण से संबंधित कई सूचनाएं जिला मुख्यालय से शासन को भेजी जा चुकी हैं, फिर भी फाइल शासन में अटकी है। नए बस अड्डे और वर्कशॉप के अभाव में खीरी के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
शहर के बीचोंबीच स्थित मौजूदा बस अड्डे में बसें खड़ी करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। इससे अधिकांश चालक-परिचालक बसों को गुरु गोविंद चौक से रोडवेज तक सड़क किनारे खड़ा करते हैं, जिससे जाम की समस्या होती है।
कई चालक-परिचालक बसों को स्टेशन तक न लाकर एलआरपी या राजापुर चौराहा पर ही यात्रियों को उतारकर चले जाते हैं। खुद का वर्कशॉप न होने से डिपो को नई बसें नहीं मिल पा रही हैं। बसों को डीजल लेने के लिए गोला डिपो जाना पड़ता है। निगम दो दशकों से वर्कशॉप और नए बस अड्डे के लिए जमीन तलाश रहा था, लेकिन जमीन नहीं मिल सकी।
तत्कालीन डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के प्रयासों से एक साल पहले जमीन चिह्नित कर रोडवेज निगम को दी गई थी। यह जमीन गोला रोड पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय इंटर कॉलेज के आगे है और शहर से बाहर स्थित है। शासन स्तर से कई बार इसकी रिपोर्ट मांगी जा चुकी है, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
दान की जमीन पर बना है पुराना बस अड्डा
लखीमपुर का बस अड्डा दान की जमीन पर बना है। 25 मार्च 1965 को तत्कालीन परिवहन मंत्री मुजफ्फर हुसैन ने भवन का उद्घाटन किया था। उस समय बसों की संख्या सीमित और आबादी कम थी। धीरे-धीरे आबादी और बसों की संख्या बढ़ती गई, लेकिन जगह सीमित ही रही। मौजूदा समय में रोडवेज के पास 85 अनुबंधित और 15 निगम की बसें हैं।
जर्जर भवन गिराकर बनाया जा रहा नया बस अड्डा
शहर के बीच स्थित लखीमपुर बस अड्डे का जर्जर भवन गिराकर नया बनाया जा रहा है। ऐसे में शहरवासियों के लिए रोडवेज बस स्टेशन की समस्या और बढ़ गई है। पर्याप्त जगह न मिलने के कारण बसों को सड़क किनारे खड़ा करना पड़ रहा है। लखीमपुर में शाहजहांपुर, गोला, सीतापुर, लखनऊ, पीलीभीत, मेरठ आदि डिपो की बसें आती-जाती हैं।